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ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच पहली बार वार्ता

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान नई कूटनीतिक संभावनाएं उभरी

तेहरानः ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ने ईरान और संयुक्त अरब अमीरात को पश्चिम एशिया में चल रहे भीषण संघर्ष की शुरुआत के बाद से अपनी अब तक की सबसे उच्च स्तरीय और महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक आयोजित करने का एक सुनहरा अवसर प्रदान किया है। इस भू-राजनीतिक संघर्ष ने यूएई और खाड़ी क्षेत्र के कई अन्य देशों को, जो अपनी जमीन पर अमेरिकी सैन्य अड्डों और सामरिक सुविधाओं की मेजबानी करते हैं, सीधे तौर पर तेहरान यानी ईरान के निशाने पर ला खड़ा किया था, जिससे पूरे मध्य पूर्व में भारी तनाव, अविश्वास और युद्ध की आशंका का माहौल बना हुआ था।

भारत की राजधानी दिल्ली में आयोजित इस प्रतिष्ठित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने शनिवार को अपने शीर्ष आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से आमने-सामने मुलाकात की।

क्राउन प्रिंस इस वैश्विक शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स के एक पूर्ण और सक्रिय सदस्य देश के रूप में यूएई का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। इस उच्च स्तरीय और बहुप्रतीक्षित बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करना (डी-एस्केलेशन) और क्षेत्रीय शांति व स्थिरता की दिशा में आगे बढ़ना था, जिसे कूटनीतिक हलकों और अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों द्वारा आपसी संबंधों को एक नया और सकारात्मक आयाम देने तथा पिछले कड़वे अध्यायों को पूरी तरह पीछे छोड़ने की एक बहुत बड़ी उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है।

पश्चिम एशिया में वर्तमान में चल रहे भारी तनाव और उथल-पुथल भरे माहौल के बीच यह कूटनीतिक मुलाकात बेहद अहम और दूरगामी मानी जा रही है, क्योंकि इससे खाड़ी देशों के बीच आपसी संवाद के बंद पड़े दरवाजे फिर से खुलने और कूटनीतिक दूरियों को पाटने में उल्लेखनीय मदद मिलने की पूरी संभावना है। बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक सुरक्षा और आपसी सहयोग के महत्व पर विशेष जोर देते हुए केवल बातचीत और संवाद के जरिए अपने तमाम आपसी मतभेदों को सुलझाने की दृढ़ प्रतिबद्धता व्यक्त की, जो आने वाले समय में मध्य पूर्व की जटिल राजनीति और कूटनीति में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव लाने की पूरी क्षमता रखती है।