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असम के चिरांग में भारत-भूटान सीमा पर वन भूमि विवाद को लेकर हिंसा भड़की

झ़ड़प में 44 से अधिक लोग और पांच पुलिस घायल

  • घायलों की संख्या अधिक होने की आशंका

  • बेदखली अभियान के दौरान यह हिंसा भड़की

  • चिरांग, कोकराझाड़ में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गयी

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: असम के चिरांग जिले में भारत-भूटान सीमा के पास स्थित रुनिखाटा आरक्षित वन क्षेत्र में अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान भारी हिंसा भड़क गई। वन विभाग द्वारा अवैध कब्जे के आरोप में कुछ स्थानीय आदिवासियों को हिरासत में लिए जाने के बाद स्थिति अनियंत्रित हो गई। आक्रोशित ग्रामीणों ने रुनिखाटा वन रेंज कार्यालय का घेराव कर वहां तोड़फोड़ की और सरकारी वाहनों को आग के हवाले कर दिया।

प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। झड़प के दौरान हुई गोलीबारी और संघर्ष में 44 से अधिक प्रदर्शनकारी और 5 पुलिसकर्मी घायल हो गए। आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर क्षेत्र में पहले से ही कड़ी सुरक्षा थी, लेकिन इस घटना ने सीमावर्ती इलाकों में चिंता बढ़ा दी है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए प्रशासन ने चिरांग और कोकराझार जिलों में मोबाइल इंटरनेट और डेटा सेवाओं को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। अतिरिक्त मुख्य सचिव अजय तिवारी द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, सोशल मीडिया के माध्यम से भड़काऊ सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।

इसी दौरान, राज्य में जमाखोरी और मानक संचालन प्रक्रियाओं के उल्लंघन के खिलाफ भी बड़ा अभियान चलाया गया। अधिकारियों ने बताया कि राज्य भर में 319 निरीक्षणों के बाद तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया और छह एलपीजी वितरकों के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए। इस कार्रवाई में 274 सिलेंडर जब्त किए गए, हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया कि राज्य में पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति सामान्य बनी हुई है।

राजनीतिक मोर्चे पर, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को गुवाहाटी में आत्मसमर्पण करने की सलाह दी है। यह बयान तब आया जब सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री की पत्नी से जुड़े एक मामले में खेड़ा की ट्रांजिट अग्रिम जमानत बढ़ाने से इनकार कर दिया। सरमा ने कहा कि खेड़ा को अब असम की सक्षम अदालत के समक्ष पेश होकर कानूनी प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।