Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
दक्षिणी लेबनान को खाली करने से नेतन्याहू का इंकार राष्ट्रपति लूला तक अब बैंकिंग घोटाले की आंच पहुंची कांगो में इबोला संक्रमितों की संख्या 896 हुई युद्ध क्षेत्र में बच्चों के खिलाफ अत्याचार President Droupadi Murmu Birthday: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का जन्मदिन; पीएम मोदी, राजनाथ सिंह समेत... NEET Re-Exam Preparation: परीक्षा से पहले आज देशभर में NTA की 'मॉक ड्रिल'; जानें सुरक्षा और संचालन क... Karnataka Welfare Schemes: अब वोटर लिस्ट में नाम होने पर ही मिलेगा सरकारी योजनाओं का लाभ; सीएम डीके ... Economic Crisis Allegations: महंगाई और बेरोजगारी पर कांग्रेस का मोदी सरकार पर निशाना; RBI गवर्नर ने ... Maharashtra Politics: शिवसेना स्थापना दिवस पर शिंदे का शक्ति प्रदर्शन; राहुल गांधी और उद्धव गुट पर स... NEET UG Student Death: गाजियाबाद के प्रताप विहार में NEET की तैयारी कर रहे छात्र की मौत; जांच में जु...

US vs Iran: 36 घंटे की सांस रोक देने वाली जंग! ईरान के पंजे से अमेरिका ने कैसे निकाला अपना सैनिक?

जंग के बीच 36घंटे के जद्दोजेहद के बाद अमेरिका ने ईरान में फंसे अपने एक सैनिक का सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे इतिहास का सबसे सफल और चुनौती पूर्ण ऑपरेशन करार दिया है. वाशिंगटन पोस्ट के मुताबिक सेना को ईरान से निकालने के लिए ट्रंप प्रशासन ने छल-कपट का सहारा लिया. आखिर में ट्रंप प्रशासन कामयाब रहा. अमेरिका ने अपने सैनिक को बचाने के लिए 3 ऐसे दांव खेले, जिसके आगे ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड बेदम हो गई.

हालांकि, इस ऑपरेशन में अमेरिका को काफी नुकसान का सामना करना पड़ा. उसके 2 हेलिकॉप्टर और एक जहाज पूरी तरह से बर्बाद हो गया.

कैसे दिया ऑपरेशन को अंजाम

1. ईरान के साथ पहले माइंडगेम खेला- अमेरिका ने सबसे पहले ईरान के साथ माइंडगेम खेला. खुफिया एजेंसी सीआईए ने यह फर्जी खबर फैला दी कि सैनिक को अमेरिका रेस्क्यू कर चुका है. बड़े-बड़े अफसरों से बयान दिलवाए गए. इस कारण रिवोल्यूशनरी गार्ड ने अपने अभियान का ट्रैक बदल दिया.

इसके बाद खुफिया एजेंसी CIA ने लोकेशन ट्रेस के जरिए लापता सैनिक के बारे में जानकारी जुटाई. उससे संपर्क साधा और उसे किसी ऊंचाई वाले जगह पर पहुंचने के लिए कहा.

2. सड़कों को नष्ट किया गया- लापता सैनिक की लोकेशन ट्रेस होने के बाद अमेरिकी सैनिकों ने पहाड़ की ओर जाने वाली सड़कों को नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू की. सीएनएन ने एयरबस सैटेलाइट के हवाले से एक तस्वीर साझा की है, जिसमें एक सड़क पर लगभग 28 बड़े गड्ढे दिखाई दे रहे हैं, जो 500-500 मीटर की दूरी पर बनाए गए थे.

अमेरिकी सेना को आशंका थी कि ऑपरेशन के दौरान इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड के जवान यहां पहुंच सकते हैं, जो उनके लिए खतरनाक साबित हो सकता था. इसलिए पहाड़ की ओर जाने वाली सड़कों को नष्ट कर दिया गया. हालांकि, इस दौरान भारी गोलीबारी का सामना भी करना पड़ा.

3. नीचे गिरे जेट और हेलिकॉप्टर नष्ट किए- आखिर में अमेरिकी सील के जवान पहाड़ की गुफाओं से सीधे सैनिक को सुरक्षित रेस्क्यू किया. इसके बाद जितने भी उसके हेलिकॉप्टर और जहाज नीचे गिरे थे, सबको नष्ट करने के लिए उनपर बमें गिरा दीं. सैनिक को ईरान की सीमा से निकालकर जब वापस लाया गया, तब राष्ट्रपति ने पोस्ट कर इसकी जानकारी दी.

सीएनएन के मुताबिक पूरे ऑपरेशन के दौरान ट्रंप व्हाइट हाउस में ही रहे. वे गोल्फ खेलने भी नहीं गए. सिर्फ खाने के टेबल पर कुछ देर बैठे.

1 जवान को बचाने के लिए 100 से ज्यादा सैनिक भेजे

1 जवान को ईरान से रेस्क्यू करने के लिए अमेरिकी सरकार ने 100 से ज्यादा सील के सैनिक भेजे थे. इसके अलावा ईरान ऑपरेशन में जुटे सीआईए के खुफिया अधिकारी भी इन जवानों के संपर्क में थे.खुद राष्ट्रपति ट्रंप पूरे मामले को मॉनिटर कर रहे थे.

अमेरिकी सरकार 1980 जैसा कोई भी हताहत नहीं चाह रही थी. 1980 में ईरान में ऑपरेशन ईगल के दौरान अमेरिका के 12 जवानों को ईरान ने बंधक बना लिया था. ये जवान अमेरिकी दूतावास के कर्मचारियों को छुड़ाने के लिए ईरान में दाखिल हुए थे.