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नीट मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध बरकरार

लगातार पांचवे दिन लोकसभा स्थगित

  • किरेण रिजिजू ने आज मोर्चा संभाला

  • राहुल गांधी से जिद छोड़ने को कहा

  • विपक्ष ने कहा जिम्मेदारी कोई लेगा

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्लीः नीट परीक्षा धांधली मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर संसद में लगातार पांचवें दिन अभूतपूर्व गतिरोध देखने को मिला। शुक्रवार को लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने जमकर नारेबाजी और हंगामा किया। सरकार की ओर से इस्तीफा न देने के कड़े रुख और विपक्ष के हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई, जिसके बाद अध्यक्ष ने कार्यवाही सोमवार (27 जुलाई) सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

दोपहर 12 बजे जब सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, तो संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मोर्चा संभाला। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार संसद में नीट-यूजी धांधली और शिक्षा सुधारों पर खुलकर चर्चा करने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन विपक्ष पहले इस्तीफा मांगने जैसी पूर्व-शर्तें थोपकर चर्चा से भाग रहा है। उन्होंने कहा,

मैं विपक्ष के नेता राहुल गांधी से आग्रह करता हूं कि वे अपने पार्टी सांसदों को समझाएं और बहस में भाग लेने के लिए राजी करें। चर्चा से पहले ऐसी शर्तें लगाना देश के लाखों छात्रों को गलत संदेश देगा। संसद ही वह सबसे उपयुक्त मंच है जहां हम इस गंभीर मुद्दे पर ठोस बात कर सकते हैं।

संसदीय कार्य मंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक में शामिल दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई का वादा किया है। उन्होंने जानकारी दी कि सरकार परीक्षा धांधली को रोकने के लिए एक कड़ा विधेयक ला रही है, जिसके तहत 10 साल की कठोर जेल और 10 करोड़ तक के भारी जुर्माने का प्रावधान है। इसके साथ ही मुकदमों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों के गठन की योजना भी तैयार की गई है, जिस पर केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में निर्णय लिया जाना है।

सदन के बाहर संवाददाताओं से बातचीत करते हुए विपक्षी नेताओं और कांग्रेस ने साफ कर दिया कि शिक्षा मंत्री की बर्खास्तगी और सीबीआई जांच की नैतिक जिम्मेदारी तय किए बिना किसी भी संसदीय चर्चा का कोई औचित्य नहीं है। विपक्ष के भारी हंगामे और धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो के नारों के बीच कार्यवाही संचालित न हो पाने के कारण आखिरकार लोकसभा को स्थगित करना पड़ा।