Breaking News in Hindi

इंडोनेशिया में अनाक क्राकाटोआ ज्वालामुखी विस्फोट

आसमान पर ज्वालामुखी राख के बादल छाने से हवाई अड्डा बंद

जकार्ताः इंडोनेशिया के सुंडा जलडमरूमध्य में स्थित प्रसिद्ध अनाक क्राकाटोआ ज्वालामुखी में भीषण विस्फोट होने से देश भर में बड़ा संकट खड़ा हो गया है। ज्वालामुखी से निकली भारी मात्रा में ज़हरीली और काली राख हवा में 150 किलोमीटर से अधिक दूरी तक फैल गई है। इस राख के गुबार के कारण अधिकारियों को देश के सबसे व्यस्त और मुख्य अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे सहित कुल आठ हवाई अड्डों पर परिचालन तत्काल प्रभाव से बंद करना पड़ा है। इस आपातकालीन कदम के चलते लगभग 1,558 उड़ानें रद्द या विलंबित हुई हैं, जिसके कारण रविवार को लगभग 1,70,000 यात्री देश के अलग-अलग हवाई अड्डों पर फँस गए।

राजधानी जकार्ता के सोएकार्नो-हट्टा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के ऊपरी हवाई क्षेत्र में ज्वालामुखी की हानिकारक राख पाए जाने के बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने सुरक्षा के मद्देनजर सोमवार सुबह 8:59 बजे तक सभी उड़ानों को निलंबित कर दिया। जकार्ता के अलावा बांडुंग के हुसैन शास्त्रनेगरा और सुमात्रा स्थित बांदर लामपुंग के राडिन इंतेन II हवाई अड्डों पर भी हवाई सेवाएं पूरी तरह से ठप कर दी गईं। परिस्थितियों की गंभीरता को देखते हुए जकार्ता प्रांतीय सरकार ने सोमवार से राजधानी के सभी स्कूलों में कक्षाओं को ऑनलाइन मोड पर चलाने का आदेश जारी किया है। सुमात्रा के दक्षिणी छोर पर बसे बांदर लामपुंग शहर की सड़कों, इमारतों और खड़े वाहनों पर ज्वालामुखी की राख की मोटी परत जम गई है।

जावा और सुमात्रा द्वीपों को विभाजित करने वाले जलडमरूमध्य में स्थित इस ज्वालामुखी में शनिवार को हुए शुरुआती विस्फोट के बाद रविवार को दो और भीषण विस्फोट दर्ज किए गए। इन विस्फोटों से निकला लावा और सैकड़ों किलोमीटर दूर तक गूँजने वाले धमाके अत्यंत खौफनाक थे। सुंडा जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी समुद्री जहाजों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं तथा ज्वालामुखी के चारों ओर 3 किलोमीटर का नो-गो ज़ोन घोषित कर दिया गया है।

इंडोनेशिया की भूवैज्ञानिक एजेंसी की प्रमुख लाना सारिया ने स्पष्ट किया कि हालिया विस्फोटों से तत्काल सूनामी का कोई ख़तरा नहीं है, लेकिन 3 किलोमीटर के दायरे में जाना बेहद जानलेवा साबित हो सकता है। प्रशांत महासागर के ‘रिंग ऑफ फायर’ पर स्थित इंडोनेशिया प्राकृतिक आपदाओं के प्रति बेहद संवेदनशील है। वर्ष 1883 में मूल क्राकाटोआ ज्वालामुखी के ऐतिहासिक विस्फोट में 35,000 से अधिक लोग मारे गए थे, जबकि वर्ष 2018 में अनाक क्राकाटोआ का एक हिस्सा समुद्र में ढहने से आई विनाशकारी सूनामी में 429 लोगों की जान चली गई थी।