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राहुल गांधी ने गहन चिकित्सीय जांच कराने की बात कही थी

जेल में जहर दिये जाने पर बोले संजय राउत

जेल के भीतर ही बीमार पड़ा था मैं

जांच करायी तो डाक्टरों ने कैंसर कहा

टॉक्सिकोलॉजी टेस्ट कराने की सलाह

राष्ट्रीय खबर

मुंबईः उद्धव ठाकरे नीत शिवसेना के राज्यसभा सांसद और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता संजय राउत ने शनिवार को पत्रकारों से कहा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने उन्हें यह पता लगाने के लिए ‘मेडिकल टॉक्सिकोलॉजी टेस्ट’ (विषाक्तता जांच) कराने की सलाह दी है कि क्या जेल में उन्हें जहर दिया गया था। गौरतलब है कि राउत को प्रवर्तन निदेशालय ने गोरेगांव पात्रा चॉल भूमि पुनर्विकास परियोजना के सिलसिले में 2022 में धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया था। राउत को मुंबई की आर्थर रोड जेल में रखा गया था, जहां से जमानत मिलने के बाद नवंबर 2022 में वे बाहर आए। बाद में राउत को पेट का कैंसर (गैस्ट्रिक कैंसर) होने का पता चला, जिसके कारण वे लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन से दूर रहे।

पत्रकारों से बातचीत में राउत ने कहा, कुछ दिन पहले मैं राहुल गांधी से मिला था, जिन्होंने मेरी बीमारी के बारे में पूछा। उन्होंने कहा कि जेल में विपक्षी नेताओं के साथ कुछ भी हो सकता है और मुझे टॉक्सिकोलॉजी टेस्ट कराने की सलाह दी। मैंने उनसे कहा कि जेल से बाहर आने के बाद मुझे कैंसर का पता चला। राहुल ने आश्चर्य जताया कि मेरे जैसे व्यक्ति को ऐसी बीमारी कैसे हो सकती है और आशंका जताई कि क्या मुझे जेल में जहर दिया गया था।

राउत ने कहा, राहुल गांधी ने कहा कि जेल में रहते हुए स्वास्थ्य में इस तरह की अचानक गिरावट चिंताजनक है और इसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए। दिल्ली में अन्य प्रमुख राजनीतिक नेताओं से चर्चा के बाद यह बात सामने आई कि जेल भेजे गए अन्य नेताओं को भी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इससे संदेह पैदा होता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि जेल की सजा काटने वाले कुछ नेताओं के भोजन में जहरीले पदार्थ मिलाए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। राउत ने बताया कि राहुल गांधी से बात करने के बाद वे जल्द ही यह विशेष मेडिकल टेस्ट कराने की तैयारी कर रहे हैं। राजनीतिक माहौल पर राउत ने कहा कि उनकी पार्टी वर्षों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से कहती रही है कि राजनीतिक विरोधियों को दुश्मन मानने के बजाय बातचीत से मुद्दे सुलझाए जाने चाहिए, लेकिन वे केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करने में विश्वास रखते हैं।