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दिल्ली से बाहर फैलने लगा कॉकरोचों का आंदोलन

सड़कों पर उतर रहे छात्र, बिहार में अनोखा नजारा

  • उत्तर भारत के इलाकों में आक्रोश

  • पुलिस के लिए संभालना कठिन

  • दिल्ली के बाद पुलिस भी सहमी

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा और विभिन्न राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं में हुए पेपर लीक के विरोध में जनआक्रोश अब केवल देश की राजधानी दिल्ली तक सीमित नहीं रहा है। उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, केरल और महाराष्ट्र सहित देश के कई प्रमुख राज्यों में छात्र संगठनों, युवाओं और अभ्यर्थियों का गुस्सा भड़क उठा है। विभिन्न राज्यों की राजधानी और प्रमुख शैक्षणिक केंद्रों में विरोध प्रदर्शनों की श्रृंखला तेज हो गई है, जिससे राज्य प्रशासनों में हड़कंप मच गया है।

इसमें से बिहार के प्रदर्शन ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। जिसकी वजह से अब दिल्ली में भी बिहार के छात्रों को बार बार बुलाया जाने लगा है। पटना में लगाये गये बैरिकेड को भी कुछ प्रदर्शनकारी अपने साथ खींच ले गये। वहां वॉटर कैनन छोड़े जाने पर आंदोलनकारी इसी पानी में नाचने लगे। वीडियो में आंदोलनकारियों द्वारा पुलिस से अश्रु गैस का इंतजाम नहीं होने पर सवाल किया गया। एक जगह पर जहां पुलिस ने मोटी रस्सी बांध रखी थी, उसी रस्सी को पकड़कर छात्रो पुलिस के साथ रस्साकसी का खेल खेलने लगे।

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज और वाराणसी में हजारों अभ्यर्थियों ने सड़कों पर जुलूस निकाला और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के खिलाफ उग्र नारेबाजी की। बिहार की राजधानी पटना में प्रदर्शनकारी छात्रों ने मुख्य मार्गों और रेलवे पटरियों को अवरुद्ध करने का प्रयास किया, जहाँ पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन और हल्के लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा। छात्रों का आरोप है कि पेपर लीक माफिया की जड़ें पूरे देश में फैली हुई हैं और राज्य सरकारों की ढिलाई के कारण अपराधियों के हौसले बुलंद हैं।

राजस्थान के जयपुर और कोटा में कोचिंग संस्थानों के छात्रों ने विशाल मानव श्रृंखला बनाई, जबकि दक्षिण भारत के राज्यों जैसे केरल और तमिलनाडु में वामपंथी और विपक्षी दलों से जुड़े छात्र संगठनों ने राजभवनों और शिक्षा विभागों के कार्यालयों का घेराव किया। पश्चिम बंगाल के कोलकाता में भी कई विश्वविद्यालय परिसरों के बाहर पुतले फूंके गए और सीबीआई (CBI) जांच की मांग की गई। विभिन्न राज्यों में बढ़ते इस उग्र आंदोलन ने केंद्र और राज्य सरकारों पर गंभीर प्रशासनिक और राजनीतिक दबाव बना दिया है। आंदोलनकारी छात्रों ने चेतावनी दी है कि जब तक परीक्षा प्रणाली में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम नहीं उठाए जाते और दोषियों को कठोर सजा नहीं मिलती, तब तक राज्य स्तरीय यह आंदोलन थमने वाला नहीं है।