हूतियों के साथ बातचीत की अपील भी की
संयुक्त राष्ट्रः संयुक्त राष्ट्र के यमन मामलों के विशेष दूत हैंस ग्रुंडबर्ग ने लाल सागर में हूति विद्रोहियों द्वारा वाणिज्यिक और अंतरराष्ट्री य जहाजों पर किए जा रहे सिलसिलेवार हमलों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को संबोधित करते हुए दूत ने चेतावनी दी कि यमन और लाल सागर के जलमार्गों में बढ़ती सैन्य आक्रामकता न केवल मध्य पूर्व के क्षेत्रीय तनाव को खतरनाक स्तर पर ले जा रही है, बल्कि इससे यमन में पिछले कुछ वर्षों से जारी शांति प्रयासों को भी भारी नुकसान पहुँच रहा है।
हूति विद्रोहियों द्वारा गाजा युद्ध के समर्थन का हवाला देते हुए लाल सागर से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों का सिलसिला लगातार जारी है। इन हमलों के जवाब में अमेरिका और ब्रिटेन की सेनाओं ने भी यमन में हूतियों के सैन्य ठिकानों पर जवाबी हवाई हमले किए हैं। विशेष दूत ग्रुंडबर्ग ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार का सैन्य दुचक्र यमन के आम नागरिकों के लिए अत्यंत घातक साबित हो रहा है, जो पहले से ही दुनिया के सबसे गंभीर मानवीय संकटों में से एक से जूझ रहे हैं।
यूएन दूत ने सभी शामिल पक्षों से तुरंत सैन्य आक्रामकता रोकने और संयम बरतने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि लाल सागर में जारी यह तनाव यमन में स्थायी संघर्ष विराम और समावेशी राजनीतिक प्रक्रिया शुरू करने के प्रयासों को पटरी से उतार रहा है। ग्रुंडबर्ग ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और क्षेत्रीय ताकतों से अपील की कि वे सैन्य बल प्रयोग के बजाय कूटनीतिक संवाद के रास्ते पर लौटें, ताकि यमन में शांति बहाल की जा सके और वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण लाल सागर मार्ग को सुरक्षित बनाया जा सके।