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आठ अक्षरों के कृत्रिम डीएनए को पढ़ने में सफलता, देखें वीडियो

जेनेटिक्स विज्ञान की दुनिया में एक बहुत बड़ी उपलब्धि

चार अतिरिक्त जोड़े गये थे

इसे हाचिमोजी प्रणाली कहते है

जटिल प्रोटिनों के निर्माण में मदद

राष्ट्रीय खबर

रांचीः जेनेटिक्स और सिंथेटिक बायोलॉजी के इतिहास में एक युगान्तकारी सफलता हासिल करते हुए कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, सैन डिएगो के वैज्ञानिकों ने जीवन के मूल आधार, यानी डीएनएकी सीमाओं को विस्तृत कर दिया है। प्राकृतिक रूप से पृथ्वी पर मौजूद सभी जीवित प्राणियों—सूक्ष्म जीवाणुओं से लेकर इंसानों और विशालकाय जीवों तक—का आनुवंशिक कोड मुख्य रूप से चार रासायनिक अक्षरों यानी न्यूक्लियोटाइड्स से मिलकर बना होता है: एडेनिन (ए), थाइमिन (टी), साइटोसिन (सी), और गुआनिन (जी)। ये चार अक्षर ही जीवन की सभी आनुवंशिक जानकारियों और निर्देशों को सहेजने का काम करते हैं।

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हालाँकि, वैज्ञानिकों ने इस प्राकृतिक सीमा को लांघते हुए 8 अक्षरों वाले एक कृत्रिम या सिंथेटिक डीएनएअल्फ़ाबेट का निर्माण किया है, जिसे हाचिमोजि डीएनए प्रणाली के नाम से जाना जाता है। इस प्रणाली में चार प्राकृतिक अक्षरों (ए, टी, सी, जी) के साथ चार अन्य कृत्रिम रासायनिक अक्षरों (जेड, पी, एस, बी) को भी जोड़ा गया है।
इस नई खोज में सबसे महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी कदम यह रहा है कि शोध टीम ने एक कोशिकीय एंजाइम—आरएनए पॉलीमरेज़ की मदद से इस 8-अक्षरों वाले सिंथेटिक डीएनए को सफलतापूर्वक पढ़वाकर दिखाया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि कोशिकीय मशीनरी न केवल प्राकृतिक डीएनएको पढ़ सकती है, बल्कि इंसान द्वारा लैब में तैयार किए गए कृत्रिम आनुवंशिक अक्षरों की भाषा को समझकर उसे प्रोसेस भी कर सकती है। यह उपलब्धि सिंथेटिक बायोलॉजी और चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत है। इसके व्यावहारिक उपयोग अत्यधिक व्यापक हैं:
8 अक्षरों वाली आनुवंशिक भाषा से ऐसे नए और जटिल प्रोटीनों का निर्माण किया जा सकता है, जो कैंसर और आनुवंशिक बीमारियों के इलाज में बेहद सटीक साबित होंगे। बायोसेंसर: पर्यावरण में मौजूद विषाक्त पदार्थों या शरीर के भीतर छिपी बीमारियों की पहचान करने वाले बेहद संवेदनशील बायोसेंसर बनाए जा सकेंगे।
डेटा स्टोरेज: कृत्रिम डीएनएमें प्राकृतिक डीएनएकी तुलना में कई गुना अधिक डेटा स्टोर करने की क्षमता होती है, जिससे यह भविष्य का सबसे शक्तिशाली और सुरक्षित डेटा स्टोरेज माध्यम बन सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज न केवल पृथ्वी पर जीवन को नए सिरे से डिज़ाइन करने का मार्ग प्रशस्त करती है, बल्कि ब्रह्मांड में किसी अन्य ग्रह पर संभावित आनुवंशिक जीवन के रूपों को समझने में भी मदद करेगी।
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