देश की औद्योगिक गतिविधियों को तेज करने की कवायद
खुली खदानों को बंद कर दिया गया था
पर्यावरण संबंधी चिंता को दरकिनार किया
कई मंत्रियों ने आमदनी का रास्ता खोजा
पनामा सिटीः मध्य अमेरिकी देश पनामा में आर्थिक और औद्योगिक विकास को एक नई दिशा देने के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण राजनीतिक और नीतिगत हलचल देखने को मिल रही है। पनामा के कई प्रमुख मंत्रियों ने देश की एक विशाल ओपन-पिट कॉपर (तांबा) खदान को दोबारा खोलने के पक्ष में जोरदार पैरवी शुरू कर दी है। यह खदान देश के सबसे बड़े औद्योगिक और आर्थिक प्रोजेक्ट्स में से एक है, जो पिछले कुछ समय से स्थानीय विरोध, कानूनी लड़ाइयों और पर्यावरणीय चिंताओं के चलते ठप पड़ी थी।
मंत्रियों का तर्क है कि इस खदान का बंद रहना देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका साबित हो रहा है। तांबे का यह विशाल भंडार पनामा की जीडीपी में महत्वपूर्ण योगदान देने और हजारों प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित करने की क्षमता रखता है। सरकार के आर्थिक विकास से जुड़े विभागों का मानना है कि वैश्विक बाजार में तांबे की बढ़ती मांग को देखते हुए इस खदान का संचालन फिर से शुरू करना देश के वित्तीय घाटे को कम करने और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए बेहद जरूरी है। इसके माध्यम से मिलने वाले राजस्व का उपयोग देश के बुनियादी ढांचे, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों के विकास के लिए किया जा सकता है।
दूसरी ओर, इस खदान को दोबारा शुरू करने का रास्ता इतना आसान नहीं है। पर्यावरणविदों, स्थानीय समुदायों और विभिन्न नागरिक संगठनों की ओर से इसका कड़ा विरोध किया जा रहा है। विरोधियों का मुख्य तर्क यह है कि इस तरह की विशाल ओपन-पिट माइनिंग से स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र, जंगलों और जैव विविधता को अपूरणीय क्षति पहुंचती है, साथ ही जल स्रोतों के दूषित होने का भी गंभीर खतरा रहता है। अतीत में भी इस मुद्दे पर देश भर में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे, जिसके बाद न्यायालयों और पिछली सरकारों को इस पर कड़े कदम उठाने पड़े थे।
अब मंत्रियों द्वारा इस मामले को फिर से जोर-शोर से उठाने के बाद पनामा की राजनीति और समाज में एक नई बहस छिड़ गई है। एक तरफ जहां सरकार आर्थिक लाभ और वित्तीय स्थिरता का हवाला दे रही है, वहीं दूसरी तरफ पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक हितों की रक्षा करने वाले समूह इसे रोकने की मांग पर अड़े हुए हैं। आने वाले हफ्तों में यह देखना बेहद दिलचस्प और महत्वपूर्ण होगा कि पनामा सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर जनता और अदालतों को कैसे संतुष्ट करती है तथा आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच किस प्रकार संतुलन बिठाती है।