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सुप्रीम कोर्ट मणिपुर हिंसा केस के लिए बना सकती है स्पेशल कोर्ट

कामजोंग में रात को बेली ब्रिज का उड़ा दिया

  • नागा संगठनों ने विस्फोट की जांच की मांग की

  • एनएससीएन आई एम में बंटवारा हो गया

  • डरा रहा ब्रह्मपुत्र का रौद्र रूप, 64 की मौत

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: पूर्वोत्तर भारत इस समय प्राकृतिक आपदा और गंभीर राजनीतिक व सामाजिक चुनौतियों से एक साथ जूझ रहा है। एक तरफ जहां असम में कुदरत का कहर जारी है, वहीं मणिपुर हिंसा और नागा राजनीतिक घटनाक्रमों को लेकर बड़े प्रशासनिक व न्यायिक कदम उठाए जा रहे हैं। असम के 25 जिलों में भारी बारिश और विनाशकारी बाढ़ के कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।

राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पुष्टि की है कि आई बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 50 हो गई है, जबकि 100 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं। संकट की इस घड़ी में लगभग 15.64 लाख लोग प्रभावित हुए हैं।  शिवसागर जिले के नाज़िरा उपखंड में लगभग 40 परिवारों के लापता होने से हताहतों का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। यद्यपि पिछले 24 घंटों में जलस्तर में मामूली सुधार हुआ है, फिर भी दुर्गम इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी हैं।

उच्चतम न्यायालय ने मई 2023 से जारी मणिपुर जातीय हिंसा से जुड़े आपराधिक मुकदमों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष अदालतों के गठन का प्रस्ताव दिया है। चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सीबीआई और राज्य एसआईटी को निर्देश दिया है कि वे पीड़ितों को एक हफ्ते के भीतर चार्जशीट की प्रतियां उपलब्ध कराएं।

अदालत ने जातीय हिंसा के बाद से लापता 30 लोगों की नए सिरे से जांच करने का जिम्मा मणिपुर हाई कोर्ट को सौंपा है। इस बीच, कामजोंग जिले में नंबन नदी पर बने 130 फीट लंबे बेली ब्रिज को विस्फोट से उड़ाए जाने के बाद नागा नागरिक संगठनों ने घटना की न्यायिक जांच की मांग की है।

नागा राजनीतिक आंदोलन में एक बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। म्यांमार स्थित एनएससीएन- आईएम के ईस्टर्न फ्लैंक ने इकाटो आई. चिशी स्वू (संगठन के सह-संस्थापक इसाक चिशी स्वू के बेटे) की अगुवाई में अपनी अलग अंतरिम सरकार बनाने की घोषणा कर दी है। 21 जुलाई को माउंट होरेब कैंप में आयोजित बैठक के बाद लिया गया यह फैसला थुइंगालेंग मुइवा के नेतृत्व वाले मुख्य हेब्रोन गुट से उनके औपचारिक अलगाव को दर्शाता है।