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चुनाव करीब आते ही सक्रिय हो गयी ईडी की टीम

तृणमूल प्रत्याशी देबाशीष कुमार से दोबारा की पूछताछ

राष्ट्रीय खबर

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मी के बीच प्रवर्तन निदेशालय ने कथित भूमि घोटाले की जांच के सिलसिले में तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और रासबिहारी विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार देबाशीष कुमार पर शिकंजा कस दिया है। शुक्रवार को एक हफ्ते के भीतर यह दूसरी बार था जब देबाशीष कुमार को केंद्रीय एजेंसी के सवालों का सामना करना पड़ा।

पांच घंटे की लंबी पूछताछ कोलकाता नगर निगम के मेयर परिषद के सदस्य और विधानसभा में उप मुख्य सचेतक देबाशीष कुमार सुबह करीब 11:30 बजे साल्ट लेक स्थित ईडी के सीजीओ कॉम्प्लेक्स कार्यालय पहुंचे। लगभग पांच घंटे तक चली लंबी पूछताछ के बाद वे शाम को बाहर निकले। मीडिया के सवालों का संक्षिप्त जवाब देते हुए उन्होंने केवल इतना कहा, मुझे जो कुछ भी कहना है, मैं अपनी पार्टी को बताऊंगा। इससे पहले सोमवार को भी उनसे इसी मामले में विस्तृत पूछताछ की गई थी।

क्या है पूरा मामला? यह मामला विभिन्न परियोजनाओं के लिए भूमि खरीद में कथित अनियमितताओं और निवेशकों को लुभाकर उनके साथ की गई धोखाधड़ी से जुड़ा है। ईडी के सूत्रों के अनुसार, पिछले सप्ताह कोलकाता के बालीगंज और चौरंगी रोड स्थित एक बड़े व्यवसायी के आवास और कार्यालय पर छापेमारी की गई थी। इस तलाशी के दौरान जब्त किए गए दस्तावेजों में देबाशीष कुमार के नाम का जिक्र आया था। जांच एजेंसी ने इस मामले में रिपोर्ट दर्ज की है, जो मुख्य रूप से जिलों के उन निवेशकों की शिकायतों पर आधारित है जिन्होंने इन परियोजनाओं में अपना पैसा लगाया था।

प्रवर्तन निदेशालय ने इस जांच के दायरे को बढ़ाते हुए तृणमूल कांग्रेस के दो अन्य दिग्गज मंत्रियों को भी तलब किया है। दमकल और आपातकालीन सेवा मंत्री सुजीत बसु को 6 अप्रैल और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री रथिन घोष को 8 अप्रैल को पूछताछ के लिए बुलाया गया है। हालांकि, इन दोनों मंत्रियों से पूछताछ नगर पालिकाओं में हुए कथित भर्ती घोटाले के सिलसिले में की जाएगी। चुनाव के ऐन वक्त पर केंद्रीय एजेंसियों की इस सक्रियता ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है, जहाँ सत्ताधारी दल इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रहा है।