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गगनयान के यात्रियों का लद्दाख में अभ्यास

नासा के अंतरिक्ष यान चंद्रमा की तरफ बढ़ चला है

राष्ट्रीय खबर

श्रीनगरः एक ओर जहाँ नासा का आर्टेमिस-2 मिशन चंद्रमा की ओर बढ़ने की तैयारी में है, वहीं भारत के चार जांबाज अंतरिक्ष यात्री (गगनयात्री) लद्दाख की बर्फीली वादियों और दुर्गम पहाड़ियों में भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों का पूर्वाभ्यास कर रहे हैं। लद्दाख के इस पथरीले और ऑक्सीजन की कमी वाले क्षेत्र को मूनस्केप (चंद्रमा जैसी सतह) कहा जाता है, जहाँ मिशन मित्रा के तहत मानवीय सहनशक्ति और टीम वर्क का परीक्षण किया जा रहा है।

इस मिशन को इसरो के ह्यूमन स्पेस फ्लाइट सेंटर और प्रोटोप्लैनेट द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष यान की तकनीकी क्षमताओं के साथ-साथ मानवीय मशीन यानी अंतरिक्ष यात्री के मानसिक और शारीरिक व्यवहार को समझना है। शून्य से नीचे तापमान, कम ऑक्सीजन (हाइपोक्सिया) और अकेलेपन जैसी चुनौतीपूर्ण स्थितियों में एक टीम के रूप में अंतरिक्ष यात्री कैसे प्रतिक्रिया देते हैं, यह इस मिशन का केंद्र बिंदु है। एक समर्पित मनोवैज्ञानिक दल हर गतिविधि पर पैनी नजर रख रहा है।

भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन के लिए चुने गए चार गगनयात्री—ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्णन नायर, अजीत कृष्णन, अंगद प्रताप और शुभांशु शुक्ला—भारतीय वायुसेना के अनुभवी टेस्ट पायलट हैं। ग्रुप कैप्टन नायर ने लद्दाख की शांति और आर्टेमिस मिशन के संदर्भ में वसुधैव कुटुंबकम के दर्शन को दोहराते हुए कहा कि अंतरिक्ष से पृथ्वी को देखना इस प्राचीन दर्शन को और मजबूत करता है कि पूरी दुनिया एक परिवार है। ये चारों जांबाज ही 2040 तक भारत के चंद्रमा पर मानव उतारने के सपने को साकार करेंगे।

लद्दाख के ठंडे रेगिस्तान को इसकी विषम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण चुना गया है। यहाँ अत्यधिक पराबैंगनी विकिरण, कम वायुदाब और खारा पर्माफ्रॉस्ट जैसी स्थितियाँ अन्य ग्रहों (जैसे मंगल या चंद्रमा) के वातावरण से काफी मिलती-जुलती हैं। समुद्र तल से लगभग 4.3 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित त्सो कर घाटी में इन यात्रियों को टेंटों में रहकर सीमित सुविधाओं के बीच अनुशासन, सहानुभूति और स्पष्ट संचार का अभ्यास कराया जा रहा है।

इसरो के अनुसार, यह मिशन केवल प्रशिक्षण नहीं बल्कि एक वैज्ञानिक मापन है। इससे पहले 2024 में लहाम और 2025 में अनुगामी व होप जैसे एनालॉग मिशनों के जरिए डेटा जुटाया गया था। इन अभ्यासों से प्राप्त डेटा का उपयोग 2040 के चंद्र मिशन के लिए चालक दल के चयन और उनके स्वास्थ्य प्रबंधन के लिए किया जाएगा। मिशन मित्रा यह सुनिश्चित कर रहा है कि जब भारत अंतरिक्ष की गहराइयों में कदम रखे, तो उसके यात्री मानसिक और शारीरिक रूप से अभेद्य हों।