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जालोर में गोमाता के प्रति अनूठी आस्था, ‘राधा’ गाय पहनती है 10 किलो चांदी के गहने, बन रहा 1 करोड़ का भव्य ‘राधा महल’

जालोर (राजस्थान): राजस्थान के जालोर जिले अंतर्गत धानोल गांव के निवासी, प्रमुख व्यवसायी व रेलवे ठेकेदार नरेंद्र पुरोहित अपनी पूज्य गाय ‘राधा’ के प्रति अगाध आस्था और अनूठे समर्पण को लेकर देश भर में चर्चा के केंद्र बने हुए हैं।

कांकरेज नस्ल की इस अनमोल गाय को वे अपने परिवार का अभिन्न सदस्य मानते हैं। विशेष धार्मिक एवं मांगलिक पर्वों पर करीब 10 किलोग्राम शुद्ध चांदी के आभूषणों से ‘राधा’ का मनमोहक श्रृंगार किया जाता है। इन पारंपरिक आभूषणों की अनुमानित बाजार कीमत लगभग 24 लाख रुपये बताई जा रही है। यही नहीं, अपनी प्रिय गोमाता के निवास हेतु वे लगभग 1 करोड़ रुपये की विशाल लागत से दो मंजिला भव्य ‘राधा महल’ का निर्माण भी करवा रहे हैं।

💼 1500 रुपये की नौकरी से रेलवे ठेकेदार बनने तक का सफर, नरेंद्र पुरोहित ने बयां की ‘राधा’ के आने की कहानी

व्यापारी नरेंद्र पुरोहित बताते हैं कि वर्ष 2019 में जब ‘राधा’ उनके गृह प्रवेश में आई, उसके बाद उनके जीवन में चमत्कारिक व अभूतपूर्व परिवर्तन आया।

उन्होंने अपने अतीत को याद करते हुए बताया कि एक दौर ऐसा था जब वे मात्र 1,500 रुपये मासिक मानदेय पर नौकरी करने को विवश थे। किंतु ‘राधा’ के आगमन के उपरांत उनके व्यापार व वित्तीय समृद्धि में निरंतर वृद्धि होती चली गई। वर्तमान में वे एक सफल कंस्ट्रक्शन कंपनी का संचालन करने के साथ-साथ भारतीय रेलवे के बड़े ठेके भी लेते हैं। इसी असीम आस्था व कृतज्ञता के कारण उन्होंने ‘राधा’ को अपने परिवार में सर्वोच्च स्थान दिया है।

🏰 200 गज भूमि पर आकार ले रहा दो मंजिला ‘राधा महल’, साधु-संतों व हवन हेतु भी होगी विशेष व्यवस्था

नरेंद्र पुरोहित ने बताया कि पूर्व में ‘राधा’ उनके मुख्य मकान में ही निवास करती थी और समूचा परिवार उस घर को ‘गोमाता का महल’ मानकर पूजता था।

तत्पश्चात लोगों की विभिन्न टिप्पणियों के उपरांत उन्होंने ‘राधा’ हेतु पृथक से एक भव्य महल निर्मित कराने का दृढ़ संकल्प लिया। माह नवंबर 2025 में प्रारंभ हुआ यह निर्माण कार्य लगभग 200 वर्ग गज क्षेत्र पर द्रुत गति से चल रहा है। इस भवन का ग्राउंड फ्लोर पूर्णतः ‘राधा’ के स्वच्छंद भ्रमण, हरा चारा खाने व विश्राम हेतु समर्पित रहेगा। वहीं, भवन के ऊपरी हिस्से में पूज्य साधु-संतों के प्रवास, धार्मिक हवन-कुंड व श्रद्धालुओं के बैठने हेतु अलग से व्यवस्था की जा रही है। इस महल का निर्माण कार्य आगामी कुछ महीनों में पूर्ण होने की संभावना है।

👑 24 लाख के चांदी-सोने के आभूषणों से होता है श्रृंगार, सेवा में चौबीसों घंटे तैनात रहते हैं 7 सेवक

नरेंद्र पुरोहित के अनुसार, ‘राधा’ हेतु विशेष रूप से गले की भव्य कंठी, मस्तक का स्वर्ण आभूषण तथा अन्य नक्काशीदार गहने तैयार करवाए गए हैं।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व अन्य पावन अवसरों पर गोमाता का अलौकिक व राजसी श्रृंगार किया जाता है। ‘राधा’ की समुचित देखभाल, स्वच्छता एवं उत्तम आहार प्रबंधन हेतु सात समर्पित सेवक नियमित रूप से उसकी सेवा में संलग्न रहते हैं।

🔔 2021 में पथमेड़ा गोशाला में रचाई गई थी ‘राधा’ की शादी, ग्रामीणों ने गाजे-बाजे के साथ निकाली थी बारात

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2021 में सांचौर स्थित विश्वविख्यात पथमेड़ा गोशाला में ‘राधा’ का एक नंदी के साथ संपूर्ण वैदिक एवं धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह संपन्न कराया गया था।

इस ऐतिहासिक वैवाहिक आयोजन में धानोल गांव के अनेक ग्रामीण सहर्ष बाराती बनकर सम्मिलित हुए थे। विवाह संस्कार के उपरांत गाय और नंदी को विभिन्न प्रमुख तीर्थ स्थलों व देवस्थानों के दर्शन भी करवाए गए थे। नरेंद्र पुरोहित का कहना है कि उनके परिवार में गोसेवा व गोमाता के प्रति असीम श्रद्धा पीढ़ियों से चली आ रही है और आज भी उनका संपूर्ण परिवार गोसेवा को अपना परम सौभाग्य एवं सर्वोच्च धर्म मानता है।