Breaking News in Hindi

अब सीएम लोगों से बात करेंगे पीएम मोदी

पूरे देश को विश्वास में लेने की पहल जारी है

  • एकता बनाये रखने पर अब जोर है

  • संसद में भी पहले बयान दिया था

  • ईरान युद्ध से ऊर्जा आपूर्ति का संकट

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और युद्ध के वैश्विक प्रभावों को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय संघर्ष के बीच भारत की आंतरिक और आर्थिक तैयारियों की समीक्षा करना है। गौरतलब है कि इस मुद्दे पर बुधवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में एक सर्वदलीय बैठक भी बुलाई गई थी, जिसमें सभी राजनीतिक दलों को स्थिति की गंभीरता से अवगत कराया गया था।

सूत्रों के अनुसार, ईरान द्वारा सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य की घेराबंदी जारी रहने के कारण वैश्विक ऊर्जा प्रवाह और कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। ऐसे में इस बैठक का केंद्र टीम इंडिया की भावना के साथ केंद्र और राज्यों के प्रयासों में तालमेल सुनिश्चित करना होगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान इस संकट पर चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने कहा था कि इस युद्ध के प्रभाव लंबे समय तक बने रहने की संभावना है, इसलिए देश के सभी पक्षों को मिलकर काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने राज्य सरकारों को प्रोत्साहित किया कि वे सुनिश्चित करें कि वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद भारत की विकास दर प्रभावित न हो।

प्रधानमंत्री ने कोविड-19 महामारी के दौरान दिखाए गए टीम इंडिया के अनुकरणीय उदाहरण को याद किया, जब केंद्र और राज्यों ने टेस्टिंग, टीकाकरण और आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति के लिए मिलकर काम किया था। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि वर्तमान वैश्विक संकट के समय में भी उसी एकजुटता और सहयोग की भावना को प्रदर्शित करने की आवश्यकता है।

कल होने वाली इस बैठक में मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों में संभावित वृद्धि और राज्यों में ईंधन के भंडार की स्थिति। युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्ग बाधित होने से आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर पड़ने वाले असर को नियंत्रित करना। वैश्विक मंदी के संकेतों के बीच घरेलू उत्पादन और आर्थिक गतिविधियों को गति देना। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है और अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति में स्थिरता भारत के आर्थिक हितों के लिए सर्वोपरि है।