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मध्य पूर्व में तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट की कगार पर मध्य पूर्व

अपने ऊपर हमले के बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई

तेहरानः मध्य पूर्व में तनाव अब एक ऐसे चरम बिंदु पर पहुँच गया है जहाँ संपूर्ण वैश्विक अर्थव्यवस्था दांव पर लगी है। ईरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि संयुक्त राज्य अमेरिका या इजरायल उसके बिजली संयंत्रों या ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाते हैं, तो वह पूरे क्षेत्र के ऊर्जा स्थलों को मलबे में तब्दील कर देगा।

यह कठोर बयान ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया गया। गालिबाफ ने कहा कि ईरान पर हमले की स्थिति में क्षेत्र के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को ऐसी क्षति पहुँचाई जाएगी जिसे कभी सुधारा नहीं जा सकेगा। यह तनाव तब और बढ़ गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को चेतावनी दी कि यदि उसने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत नहीं खोला, तो अमेरिका ईरान के बिजली घरों को नेस्तनाबूद कर देगा।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल गलियारा है, जहाँ से वैश्विक तेल और तरल प्राकृतिक गैस की आपूर्ति का लगभग पाँचवाँ हिस्सा गुजरता है। ईरान ने 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों के बाद से इस मार्ग की प्रभावी रूप से घेराबंदी कर रखी है।

ईरान का दावा है कि यह मार्ग केवल उसके दुश्मनों (अमेरिका और उसके सहयोगियों) के लिए बंद है, बाकी दुनिया के लिए खुला है। हालांकि, इस आंशिक नाकाबंदी ने ही 1970 के दशक के बाद का सबसे भीषण तेल संकट पैदा कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे वैश्विक परिवहन और विनिर्माण क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।

ईरान की विशिष्ट सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने अपने बयान में और भी कड़ा रुख अपनाया है। उसने स्पष्ट किया है कि यदि वाशिंगटन ने ईरानी ऊर्जा सुविधाओं पर हमला किया, तो वे अमेरिकी शेयर वाली कंपनियों को पूरी तरह नष्ट कर देंगे। साथ ही, उन देशों में स्थित ऊर्जा सुविधाओं को भी वैध लक्ष्य माना जाएगा जो अमेरिकी सैन्य ठिकानों की मेजबानी करते हैं। गालिबाफ के अनुसार, इस जवाबी कार्रवाई से तेल की कीमतें लंबे समय के लिए इतनी बढ़ जाएंगी कि विश्व अर्थव्यवस्था उसे संभाल नहीं पाएगी।

वर्तमान स्थिति एक डेडलॉक में बदल गई है; जहाँ ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है, वहीं ईरान अपनी संप्रभुता और ऊर्जा सुरक्षा के नाम पर पूरे क्षेत्र के तेल नेटवर्क को बंधक बनाने की स्थिति में है। यदि कूटनीति विफल रहती है, तो आने वाले दिन न केवल मध्य पूर्व के लिए बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा निर्भरता के लिए विनाशकारी साबित हो सकते हैं।