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कैरेबियाई देश क्यूबा में दूसरी बार भीषण बिजली संकट

अमेरिकी प्रतिबंधों से जूझते देश में दूसरी परेशानी हावी

हवानाः कैरेबियाई देश क्यूबा इस समय अपने इतिहास के सबसे भीषण ऊर्जा संकट से जूझ रहा है। रविवार की सुबह क्यूबा सरकार ने देशव्यापी बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए आपातकालीन प्रयास शुरू किए। यह कदम शनिवार शाम 6:32 बजे पूरे देश की बिजली गुल होने के बाद उठाया गया है।

गौर करने वाली बात यह है कि एक ही सप्ताह के भीतर यह दूसरी बार है जब क्यूबा का नेशनल ग्रिड पूरी तरह चरमरा गया है। इस संकट ने द्वीप की लगभग 1 करोड़ (10 मिलियन) की आबादी को पूरी तरह अंधेरे में धकेल दिया है, जिससे सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।

क्यूबा के ग्रिड ऑपरेटर यूएनई के अनुसार, इस ब्लैकआउट की मुख्य वजह पूर्वी प्रांत कामागुए के नुएविटास स्थित एक प्रमुख बिजली संयंत्र का अचानक तकनीकी रूप से खराब होकर ऑफलाइन हो जाना था। इस विफलता ने एक कैस्केड इफेक्ट पैदा किया, जिससे पूरे देश का बिजली नेटवर्क ताश के पत्तों की तरह ढह गया।

क्यूबा के ऊर्जा और खान मंत्रालय ने बताया कि रविवार सुबह तक सभी प्रांतों में माइक्रोसिस्टम्स (छोटे और बंद सर्किट) स्थापित कर लिए गए हैं ताकि अस्पतालों, जल आपूर्ति और खाद्य वितरण जैसी अत्यंत आवश्यक सेवाओं को चालू रखा जा सके। वर्तमान में एनर्गास द्वारा संचालित दो गैस-आधारित संयंत्र काम कर रहे हैं, जिससे कुछ राहत की उम्मीद जगी है।

राजधानी हवाना की सड़कों पर रविवार की सुबह मायूसी भरी रही। बिजली न होने के कारण सेलुलर सेवा और इंटरनेट पूरी तरह ठप हो गए, जिससे लोग अपनों से संपर्क करने में भी असमर्थ रहे। स्थानीय निवासी लियोनी अल्बर्टो ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा, जिंदगी में कुछ नहीं बदल रहा, हम एक ही ढर्रे पर फंसे हुए हैं। उन्होंने बताया कि बार-बार होने वाली कटौती के कारण उन्हें सप्ताह में कम से कम दो बार लकड़ी पर खाना पकाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। सड़कों पर लोग मच्छरों से जूझते और पड़ोसियों के साथ अपनी स्थिति पर चर्चा करते नजर आए।

क्यूबा के प्रधानमंत्री मैनुअल मरेरो ने स्वीकार किया है कि रिकवरी के ये प्रयास अत्यंत जटिल परिस्थितियों के बीच किए जा रहे हैं। सरकार ने इस संकट के लिए अमेरिका की तेल नाकाबंदी को जिम्मेदार ठहराया है, जिसने द्वीप के पहले से ही पुराने और जर्जर ऊर्जा बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुँचाया है। ईंधन की कमी और स्पेयर पार्ट्स के अभाव में क्यूबा के थर्मल प्लांट अपनी क्षमता से बहुत कम पर काम कर रहे हैं, जिससे ब्लैकआउट अब वहां की नियति बनता जा रहा है।