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ममता सरकार को सुप्रीम कोर्ट की फटकार

क्या ड्यूटी पर तैनात ईडी अधिकारियों के अधिकार खत्म हो जाते हैं?

  • आई पैक से तलाशी से जुड़ा मामला

  • याचिका की विचारणीयता पर बहस

  • एजेंसियों के अफसरों के भी अधिकार है

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशालय की तलाशी अभियानों में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कथित हस्तक्षेप से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से कड़े सवाल पूछे हैं। न्यायालय ने ममता बनर्जी सरकार के सामने एक जवाबी प्रश्न रखते हुए पूछा, क्या होगा यदि केंद्र में आपकी सरकार सत्ता में हो और कोई अन्य राजनीतिक दल राज्य स्तर पर वैसा ही व्यवहार करे (जैसा बंगाल में हो रहा है)?

प्रवर्तन निदेशालय ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों पर राजनीतिक सलाहकार फर्म इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी  के कार्यालयों में चल रही जांच और छापेमारी में बाधा डालने का गंभीर आरोप लगाया है। बता दें कि तृणमूल कांग्रेस के लिए काम करती है। यह छापेमारी इसी साल जनवरी की शुरुआत में एक मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) जांच के हिस्से के रूप में की गई थी।

न्यायमूर्ति पी.के. मिश्रा और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने ईडी द्वारा अनुच्छेद 32 के तहत दायर इस याचिका की विचारणीयता पर उठाए गए ऐतराजों पर सवाल खड़े किए। न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि वित्तीय अपराधों की जांच करने वाले ईडी के कुछ अधिकारियों ने अपनी व्यक्तिगत क्षमता में भी यह याचिका दायर की है, जो उनके मौलिक अधिकारों से जुड़ी है।

अदालत ने सख्त लहजे में पूछा कि क्या ऑन-ड्यूटी अधिकारियों को राज्य के हस्तक्षेप से सुरक्षा पाने का अधिकार नहीं है? इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए, शीर्ष अदालत ने संघीय ढांचे में जांच एजेंसियों की स्वायत्तता और राज्य सरकारों के सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया है।