खाड़ी क्षेत्र के फैलते युद्ध पर नया कूटनीतिक प्रयास
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः भारत और फ्रांस के बीच बढ़ते रणनीतिक तालमेल की कड़ी में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ टेलीफोन पर बातचीत की। इस चर्चा का मुख्य केंद्र पश्चिम एशिया में तेजी से बिगड़ते हालात और वहां शांति बहाली के कूटनीतिक प्रयास थे। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब ईरान-इजरायल संघर्ष न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि केवल संवाद और कूटनीतिक भागीदारी के जरिए ही क्षेत्र में स्थिरता लाई जा सकती है। पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से भारत ने अपनी ‘ग्लोबल आउटरीच’ तेज कर दी है। पीएम मोदी अब तक सार्क के आठ नेताओं और कई वैश्विक साझेदारों के साथ विचार-विमर्श कर चुके हैं। राष्ट्रपति मैक्रों के साथ हुई इस बातचीत में दोनों नेताओं ने भविष्य में निरंतर संपर्क बनाए रखने और शांति प्रयासों में समन्वय करने पर सहमति जताई।
यह बातचीत उस समय और भी महत्वपूर्ण हो गई जब हिंद महासागर में एक गंभीर नौसैनिक घटना घटी। भारत द्वारा आयोजित मिलन 2026 अभ्यास से लौट रहे एक ईरानी नौसैनिक जहाज पर श्रीलंका के तट के पास हमला किया गया, जिसमें 84 नाविकों के मारे जाने की आशंका है। यह हमला भारत के समुद्री पड़ोस में हुआ है, जिससे यह स्पष्ट है कि पश्चिम एशिया का युद्ध अब समुद्री व्यापारिक मार्गों तक फैल रहा है।
भारत के लिए पश्चिम एशिया में स्थिरता उसके ऊर्जा आयात और सुरक्षित व्यापारिक मार्गों के लिए अनिवार्य है। ईरान-इजरायल संघर्ष में अब अमेरिका के भी सीधे तौर पर शामिल होने से स्थिति नियंत्रण से बाहर होती दिख रही है। मिसाइल हमलों, ड्रोन हमलों और नौसैनिक टकरावों ने पूरी दुनिया को डरा दिया है। ईरान ने सीधे तौर पर अमेरिका और इजरायल पर अपनी संप्रभुता के उल्लंघन का आरोप लगाया है, जबकि वाशिंगटन और तेल अवीव इसे ईरानी सैन्य क्षमताओं को नष्ट करने की कार्रवाई बता रहे हैं। भारत और फ्रांस, दोनों ही देश इस बढ़ते टकराव को रोकने के लिए तनाव कम करने की वकालत कर रहे हैं।