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चीन का विशाल रक्षा बजट ए आई और 6 जी युद्ध की तैयारी

रक्षा बजट में सात फीसद की बढ़ोत्तरी

बीजिंगः यहां आयोजित चीन की नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के वार्षिक सत्र ने वैश्विक रक्षा गलियारों में हलचल मचा दी है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वर्ष 2026 के लिए चीन के रक्षा बजट में 7 प्रतिशत की भारी वृद्धि का प्रस्ताव रखा है। यह घोषणा एक ऐसे नाजुक समय में की गई है, जब ताइवान जलडमरूमध्य और दक्षिण चीन सागर में सैन्य गतिविधियां अपने चरम पर हैं और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन डगमगा रहा है।

चीन का यह बढ़ा हुआ बजट केवल पारंपरिक हथियारों या सैनिकों की संख्या बढ़ाने के लिए नहीं है। सैन्य विश्लेषकों के अनुसार, पीपल्स लिबरेशन आर्मी अब अल्गोरिद्मिक युद्ध की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। इसका अर्थ है कि भविष्य के युद्ध अब केवल शक्ति से नहीं, बल्कि डेटा, कोडिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के तालमेल से जीते जाएंगे।

इस बजट का एक बड़ा हिस्सा एआई से संचालित हजारों छोटे ड्रोनों का एक समूह, जो दुश्मन के रडार को भ्रमित कर एक साथ हमला करने में सक्षम है। बिना मानव चालक दल के समुद्र में गश्त करने और हमले करने वाले जहाज। युद्ध के मैदान में बिजली की गति से डेटा साझा करने के लिए अगली पीढ़ी का नेटवर्क, जो जैमिंग के प्रति अधिक प्रतिरोधी होगा।

शी जिनपिंग का लक्ष्य 2027 तक अपनी सेना को पूरी तरह से आधुनिक बनाना है। चीन की रणनीति अब केवल धरती और समुद्र तक सीमित नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि बजट का एक गुप्त हिस्सा स्पेस वारफेयर के लिए रखा गया है। चीन अपनी ऐसी क्षमताएं विकसित कर रहा है जिससे युद्ध की स्थिति में वह दुश्मन के उपग्रह संचार को बाधित या नष्ट कर सके।

यदि ऐसा होता है, तो आधुनिक सेनाओं का जीपीएस और संचार तंत्र पूरी तरह पंगु हो जाएगा। चीन के इस आक्रामक सैन्य विस्तार ने वैश्विक स्तर पर, विशेषकर वाशिंगटन और नई दिल्ली में सुरक्षा चिंताओं को गहरा कर दिया है। भारत के लिए वास्तविक नियंत्रण रेखा पर जारी तनाव के बीच चीन की तकनीकी बढ़त भारत के लिए रणनीतिक दबाव पैदा कर सकती है।

विशेषज्ञों को डर है कि चीन की इस घोषणा के जवाब में अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत भी अपने रक्षा खर्च में वृद्धि करेंगे, जिससे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक नई और खतरनाक आर्म्स रेस शुरू हो सकती है। बीजिंग का यह कदम स्पष्ट संकेत है कि वह अब एक क्षेत्रीय शक्ति से ऊपर उठकर एक ऐसी वैश्विक महाशक्ति बनना चाहता है जिसकी सैन्य तकनीक का मुकाबला करना किसी भी देश के लिए चुनौतीपूर्ण होगा।