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दुनिया भर में समुद्र स्तर में खतरनाक वृद्धि

जलवायु परिवर्तन संबंधी आशंका की नये रिपोर्ट में पुष्टि

न्यूयॉर्कः वैज्ञानिकों की एक हालिया रिपोर्ट ने पूरी दुनिया में खतरे की घंटी बजा दी है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के एक पैनल द्वारा जारी इस विस्तृत शोध में यह चौंकाने वाला खुलासा किया गया है कि वैश्विक समुद्र का जलस्तर हमारे पिछले तमाम अनुमानों की तुलना में 30 प्रतिशत अधिक तेजी से बढ़ रहा है। यह रिपोर्ट न केवल जलवायु परिवर्तन की भयावहता को दर्शाती है, बल्कि भविष्य की एक डरावनी तस्वीर भी पेश करती है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि अंटार्कटिका और ग्रीनलैंड की विशाल बर्फ की चादरें पिघलने की जिस दर पर पहुंच गई हैं, वह अब अपरिवर्तनीय स्तर पर है। इसका सीधा अर्थ यह है कि अब इस प्रक्रिया को पूरी तरह रोकना संभव नहीं लग रहा है। वर्ष 2026 के शुरुआती दो महीनों ने ही जलवायु इतिहास के सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं; इन दो महीनों में दर्ज किया गया औसत तापमान पिछले 150 वर्षों में सबसे अधिक रहा है।

समुद्र के बढ़ते जलस्तर का सबसे घातक प्रभाव दुनिया के प्रमुख आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्रों पर पड़ेगा। रिपोर्ट में विशेष रूप से चार महानगरों को रेड ज़ोन में रखा गया है। मुंबई भारत की आर्थिक राजधानी का एक बड़ा हिस्सा समुद्र में समाने के कयामत भरे खतरे का सामना कर रहा है। न्यूयॉर्क (अमेरिका): पश्चिमी दुनिया का यह प्रमुख केंद्र भविष्य में बाढ़ और जलभराव का स्थायी शिकार बन सकता है। जकार्ता (इंडोनेशिया) और ढाका (बांग्लादेश): ये शहर अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण सबसे पहले विस्थापन का सामना करेंगे।

रिपोर्ट में एक सख्त चेतावनी दी गई है कि यदि दुनिया ने अपने कार्बन उत्सर्जन में तत्काल 50 प्रतिशत की कटौती नहीं की, तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाएगी। अनुमान है कि 2050 तक करोड़ों लोग अपनी जमीन और घर खो देंगे और जलवायु शरणार्थी बनने पर मजबूर होंगे। भारत के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि इसकी लंबी तटरेखा पर स्थित करोड़ों लोगों की आजीविका सीधे तौर पर समुद्र से जुड़ी है।

पर्यावरणविदों का स्पष्ट मानना है कि अब केवल नेट जीरो जैसे लक्ष्यों पर चर्चा करने का समय बीत चुका है। अब दुनिया को दो मोर्चों पर युद्ध स्तर पर काम करना होगा। सुरक्षा दीवारें: तटीय शहरों को डूबने से बचाने के लिए विशाल और आधुनिक समुद्री सुरक्षा दीवारों का निर्माण। शहरों का स्थानांतरण: सबसे अधिक खतरे वाले क्षेत्रों से आबादी और बुनियादी ढांचे को सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर स्थानांतरित करने की दीर्घकालिक योजना। यह रिपोर्ट महज एक चेतावनी नहीं, बल्कि मानवता के लिए आखिरी पुकार है कि यदि आज ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भूगोल का नक्शा स्थायी रूप से बदल जाएगा।