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कोचबिहार में भाजपा के रथ पर हमला का विरोध

विधानसभा चुनाव से पहले ही राजनीतिक टकराव का दौर

राष्ट्रीय खबर

कोलकाताः पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के मद्देनजर राज्य में राजनीतिक पारा चढ़ चुका है। कोचबिहार में भारतीय जनता पार्टी की परिवर्तन यात्रा को निशाना बनाए जाने की खबर ने उत्तर बंगाल में तनाव पैदा कर दिया है। बुधवार, 4 मार्च 2026 की रात को कोचबिहार के महिषबाथान इलाके में भाजपा के चुनावी रथ पर हुए हमले ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

भाजपा के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, पार्टी का ‘परिवर्तन संकल्प रथ’ जब कूचबिहार जिला कार्यालय से पुंडीबारी की ओर जा रहा था, तभी महिषबाथान के पास कुछ अज्ञात बदमाशों ने उस पर हमला कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि हमलावर बोलेरो और मोटरसाइकिलों पर सवार होकर आए थे। उन्होंने न केवल रथ के शीशे तोड़े, बल्कि चालक और वहां मौजूद कुछ कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट भी की।

भाजपा ने इस हमले का सीधा आरोप सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और स्थानीय युवा नेता सयनदीप गोस्वामी पर लगाया है। इस घटना की खबर फैलते ही भाजपा कार्यकर्ता आक्रोशित हो उठे। विरोध स्वरूप:भाजपा कार्यकर्ताओं ने पुंडीबारी चौराहे पर सड़क जाम कर दिया, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया।

विधायक सुकुमार राय और निखिल रंजन दे के नेतृत्व में पार्टी समर्थकों ने नारेबाजी की और दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा और क्षतिग्रस्त रथ को वापस जिला कार्यालय लाया गया। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने सोशल मीडिया पर ममता बनर्जी सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि बंगाल में कानून का राज खत्म हो चुका है और टीएमसी की हार निश्चित है।

उन्होंने इस कृत्य को ‘शर्मनाक’ और भाजपा की बढ़ती लोकप्रियता से पैदा हुई ‘हताशा’ का परिणाम बताया। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। कोचबिहार जिला टीएमसी अध्यक्ष अभिजीत दे भौमिक ने इसे भाजपा का ‘नाटक’ करार दिया और कहा कि चुनाव से पहले लोगों का ध्यान भटकाने के लिए भाजपा खुद ऐसी घटनाएं रच रही है। 5 मार्च 2026 को भाजपा ने टूटे हुए रथ के साथ ही अपनी यात्रा आगे बढ़ाने का निर्णय लिया, जो कोचबिहार के रासमणि मैदान से होकर सीतलकुची की ओर रवाना हुई। जैसे-जैसे 2026 के विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, बंगाल की गलियों में राजनैतिक हिंसा और वर्चस्व की यह लड़ाई और तेज होने की संभावना है।