Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
BJP OBC Politics: काशी में बीजेपी का मास्टरस्ट्रोक; अशोक चौरसिया को कमान देकर पिछड़ा वर्ग को साधने क... Lohagad Murder Case: पुणे मंगेतर हत्याकांड में SIT जांच के निर्देश; विधानसभा में गूंजा केतन अग्रवाल ... WB Anti-Social Activities Bill: पश्चिम बंगाल में 'निवारक हिरासत' का प्रावधान; विधानसभा में पेश होगा ... Sanjay Dina Patil Controversy: शिवसेना सांसद के 'बम' वाले बयान पर मचा बवाल; ठाकरे गुट ने दर्ज कराई श... Fake Helmet Factory Ghaziabad: गाजियाबाद में दो हेलमेट इकाइयों पर BIS का छापा; लाइसेंस खत्म होने के ... Passport Fees Hike 2026: 1 जुलाई से महंगा होगा पासपोर्ट बनवाना; जानिए नई दरों की पूरी लिस्ट Ram Mandir Donation Controversy: चांदी का काकभुशुण्डि मिलने के बाद भी खड़े हुए सवाल; दानदाताओं ने रसी... Ram Mandir Donation Scam: राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले में FIR दर्ज; गबन और धोखाधड़ी की धाराओं में 8 आ... LPG Supply Rules Changed: सरकार का बड़ा फैसला; व्यावसायिक LPG पर लगे सभी प्रतिबंध हटाए गए Ram Mandir Donation Scam: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ी कार्रवाई; ट्रस्ट की शिकायत पर 8 लोगों...

Meghnath Mela: 60 फीट ऊंचे स्तंभ पर हैरतअंगेज कारनामे, उल्टा लटककर झूला झूलने की अनोखी परंपरा

सिवनी : होली के अगले दिन सिवनी के पांजरा में एशिया का सबसे बड़ा ‘मेघनाथ मेला’ लगता है. होलिका दहन के अगले दिन धुरेड़ी के अवसर पर आस्था, परंपरा और हैरतअंगेज रोमांच का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है. मेघनाथ मेला आदिवासी संस्कृति का जीवंत केंद्र है. साथ ही परंपराओं को सहेजने का एक सशक्त माध्यम भी. इसलिए इस मौके पर दूर-दूर से आदिवासी आते हैं.

‘हाकड़े बिर्रे’ के जयघोष से गूंजा पांजरा

होली के अगले दिन जिसे स्थानीय भाषा में धुरेड़ी कहा जाता है, यहां मेघनाथ स्तंभ की विशेष पूजा की परंपरा निभाई गई. आदिवासी समुदाय (विशेषकर गोंड जनजाति) रावण के पुत्र मेघनाथ को अपना आराध्य देव मानकर उपासना करते हैं. मेले के दौरान पूरा परिसर ‘हाकड़े बिर्रे’ के पारंपरिक जयघोष से गुंजायमान रहा, जो इस उत्सव की धार्मिक और सांस्कृतिक ऊर्जा को प्रदर्शित करता है. मेले का मुख्य आकर्षण लगभग 60 फीट ऊंचा लकड़ी का ‘मेघनाथ स्तंभ’ है, जिसे पूरे एशिया में अपनी तरह का सबसे ऊंचा स्तंभ माना जाता है.

आस्था और रोमांच की पराकाष्ठा

मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु, जिन्हें ‘वीर’ कहा जाता है, इस ऊंचे खंभे के मचान पर चढ़ते हैं. सुरक्षा के लिए वे केवल रस्सियों के सहारे बंधे होते हैं और हवा में लटककर स्तंभ के चारों ओर चक्कर लगाते हैं. इस दौरान जमीन पर नीचे मौजूद भीड़ द्वारा श्रद्धालुओं के ऊपर नारियल फेंके जाने की भी अनूठी परंपरा है.

दिनेश पूसराम, नरपत यादव, कमलसिंह परते, जयदीप दुबे, सुरेन्द्र ठाकुर के अनुसार “लोगों में यह दृढ़ विश्वास है कि मेघनाथ स्तंभ पर उल्टा झूलने और मन्नत मांगने से गंभीर बीमारियों, संतान प्राप्ति और विवाह संबंधी जैसी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.”

होली के दिन भी रंग या गुलाल से परहेज

मेघनथ मेले में केवलारी सहित आसपास के 20-25 गांवों के हजारों आदिवासी और अन्य समाज के लोग इस भव्य आयोजन में शामिल हुए. पांजरा गांव की इस परंपरा की एक खास बात यह भी है कि धुरेड़ी के दिन, जहां देशभर में होली खेली जाती है, यहां के ग्रामीण न तो रंग उड़ाते हैं और न ही गुलाल लगाते हैं. पूरा गांव इस दिन को पूरी तरह से मेघनाथ की उपासना और सेवा के लिए समर्पित रखता है. गांव का कोई भी व्यक्ति इस दिन टीका तक नहीं लगाता, जो उनकी अपने आराध्य के प्रति गहरी निष्ठा को दर्शाता है.