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अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच युद्ध जैसे हालत

दोनों तरफ से एक दूसरे पर हुआ हमला

  • काबुल और कंधार में हवाई हमला

  • पाकिस्तान के भीतर ड्रोन हमला

  • मुजाहिद ने कहा हम वार्ता चाहते हैं

काबुलः आज सुबह से ही अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच जारी सीमा विवाद ने एक बेहद खतरनाक और गंभीर मोड़ ले लिया है। दोनों पड़ोसी देशों के बीच महीनों से चल रही छिटपुट झड़पें अब पूर्णकालिक सैन्य संघर्ष में बदलती नजर आ रही हैं, जिसे पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने आधिकारिक तौर पर खुला युद्ध करार दिया है। शुक्रवार, 27 फरवरी को स्थिति तब और अधिक बिगड़ गई जब पाकिस्तान ने देर रात शुरू किए गए अपने जवाबी सैन्य अभियान, जिसका नाम ऑपरेशन गजब-ए-हक रखा गया है, के तहत काबुल, कंधार और पक्तिया प्रांतों पर जोरदार हवाई हमले किए। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार के अनुसार, इस सैन्य कार्रवाई में अफगान तालिबान के 133 लड़ाके मारे गए हैं और 200 से अधिक घायल हुए हैं।

दूसरी ओर, तालिबान के रक्षा मंत्रालय और प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने इन हमलों की पुष्टि करते हुए कहा कि अफगान बलों ने भी जवाब में ड्रोन का उपयोग करके पाकिस्तान के भीतर सैन्य ठिकानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया है। तालिबान का कहना है कि यह कार्रवाई गुरुवार रात को पाकिस्तान द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों में किए गए हमलों का प्रतिशोध थी। यह टिट-फॉर-टैट (जैसे को तैसा) की नीति ने दोनों देशों के बीच शांति की हर उम्मीद को धुंधला कर दिया है। गंभीर होता मानवीय और राजनीतिक संकट पिछले साल अक्टूबर में हुई घातक झड़पों के बाद से ही दोनों देशों के बीच के प्रमुख जमीनी सीमा मार्ग काफी हद तक बंद हैं, जिससे व्यापार और आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है। अक्टूबर की उस हिंसा में 70 से अधिक लोगों की जान गई थी, और अब ताजा हमलों ने इस क्षेत्र की अस्थिरता को और बढ़ा दिया है।

इस बीच, अंतरराष्ट्रीय समुदाय में गहरी चिंता देखी जा रही है। ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर ने इस भारी तनाव पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उनका देश इस नाटकीय वृद्धि को लेकर अत्यंत चिंतित है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दोनों देशों से तत्काल संयम बरतने, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता में बातचीत की मेज पर वापस लौटने का आग्रह किया है। वर्तमान में अफगान सरकार ने भी युद्ध को रोकने के लिए संवाद की इच्छा व्यक्त की है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि दोनों तरफ की सेनाएं अभी भी आक्रामक स्थिति में हैं, जिससे दक्षिण एशिया की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा संकट मंडरा रहा है।