दिल्ली के लाल किला धमाके की जांच अब भी जारी
राष्ट्रीय खबर
श्रीनगरः राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने दिल्ली के लाल किला क्षेत्र में हुए बम विस्फोट की साजिश में कथित रूप से शामिल दो और आतंकी सहयोगियों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में गिरफ्तारियों की कुल संख्या अब 11 हो गई है। गिरफ्तार किए गए दोनों व्यक्तियों की पहचान गंदरबल (जम्मू-कश्मीर) के जमीर अहमद अहंगर और श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर) के तुफैल अहमद भट के रूप में हुई है।
एनआईए की जांच में खुलासा हुआ है कि ये दोनों दिल्ली धमाके के मुख्य आरोपी को हथियार उपलब्ध कराने में शामिल थे। गौरतलब है कि 10 नवंबर, 2025 को राष्ट्रीय राजधानी को दहलाने वाले इस विस्फोट में 11 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे।
इस जानलेवा धमाके में मुख्य आरोपी उमर उन नबी की भी मौत हो गई थी। इस जघन्य आतंकी कृत्य के पीछे की पूरी साजिश का पर्दाफाश करने के लिए जांच कर रही एनआईए ने पाया कि जमीर अहमद और तुफैल अहमद अंसार गजवत-उल-हिंद आतंकी संगठन के सक्रिय ओवरग्राउंड वर्कर थे।
जम्मू-कश्मीर पुलिस, हरियाणा पुलिस और अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय में काम कर रही एनआईए की जांच से यह भी पता चला है कि जमीर और तुफैल न केवल इस धमाके की साजिश में शामिल थे, बल्कि वे अन्य कई आतंकी षड्यंत्रों का भी हिस्सा थे। एजेंसी की विज्ञप्ति के अनुसार, वे भारतीय राज्य के विरुद्ध उपयोग के लिए हथियार और गोला-बारूद इकट्ठा करने में लगे थे।
एनआईए ने गहन जांच और सबूतों की पड़ताल के माध्यम से यह जानकारी प्राप्त की है। विज्ञप्ति में आगे कहा गया कि दिल्ली धमाके की साजिश का मास्टरमाइंड उमर था, जिसके साथ मुजम्मिल गनी, शाहीन सईद, मुफ्ती इरफान, अदील अहमद राथर और पांच अन्य आरोपी शामिल थे, जिन्होंने मुख्य साजिशकर्ताओं को आश्रय और रसद सहायता प्रदान की थी। ये नौ लोग पहले ही जम्मू-कश्मीर और हरियाणा के विभिन्न स्थानों से गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
आज पटियाला हाउस कोर्ट ने दिल्ली धमाका मामले में तुफैल अहमद भट और जमीर अहमद अहंगर को 10 दिनों की एनआईए रिमांड पर भेज दिया है। जांच एजेंसी के अनुसार, उन पर हथियार और गोला-बारूद इकट्ठा करने का आरोप है। जमीर अहमद अहंगर को उमर उन नबी, मुफ्ती इरफान अहमद और डॉ. अदील अहमद राथर द्वारा एक राइफल, एक पिस्तौल और जिंदा कारतूस दिए गए थे।
दोनों आरोपी अंसार गजवत-उल-हिंद आतंकी संगठन से जुड़े थे। एनआईए ने आरोपियों से अधिक विवरण प्राप्त करने और आतंकी गतिविधियों के पीछे की व्यापक साजिश का पता लगाने के लिए 15 दिनों की हिरासत मांगी थी।