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Deoghar News: देवघर ब्लड बैंक में ‘नेट टेस्ट’ अनिवार्य, लेकिन जिले में जांच मशीन ही नहीं, मरीज परेशान

देवघर: ऐसा सवाल उठ रहा है जो सिर्फ स्वास्थ्य विभाग ही नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था को कठघरे में खड़ा करता है. राज्य सरकार ने ब्लड बैंकों में Nucleic Acid Amplification Testing (NAT) टेस्ट अनिवार्य कर दिया है, लेकिन जिस जिले में यह नियम लागू किया गया, वहीं इसकी मशीन उपलब्ध नहीं है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है, जिम्मेदार कौन?

झारखंड में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं. लेकिन इस बार मामला सीधे जीवनरक्षक रक्त से जुड़ा है. जब किसी मरीज को तत्काल रक्त की आवश्यकता हो और उसे 2 से 3 दिन इंतज़ार करने को कहा जाए, तो यह केवल प्रक्रिया नहीं, बल्कि संवेदनहीनता प्रतीत होती है.

घटना के बाद नियम, पर तैयारी अधूरी

चाईबासा में संक्रमित रक्त चढ़ने से बच्चों की मौत के बाद राज्य सरकार ने सख्ती दिखाई और आदेश जारी किया कि अब एलिसा टेस्ट (Enzyme-Linked Immunosorbent Assay) के साथ-साथ नेट जांच भी अनिवार्य होगी. उद्देश्य था सुरक्षा सुनिश्चित करना. लेकिन क्या यह सुनिश्चित किया गया कि हर जिले में नेट जांच की सुविधा उपलब्ध है? हकीकत यह है कि झारखंड के कुछ चुनिंदा जिलों में ही यह सुविधा है. बाकी जिलों को नमूने बाहर भेजने पड़ते हैं.

200 किलोमीटर की दूरी, 3 दिन की देरी

देवघर के सरकारी ब्लड बैंक से नेट जांच के लिए सैंपल रांची भेजा जाता है. दूरी 200 किलोमीटर से अधिक है. रिपोर्ट आने में दो से तीन दिन का समय लग जाता है. ब्लड बैंक कर्मियों का कहना है कि कई बार दुर्लभ रक्त समूह उपलब्ध नहीं होता. ऐसे में दान किए गए रक्त की नेट जांच के बाद ही उसे जारी किया जा सकता है. आपातकालीन स्थिति में यह इंतजार मरीज और परिजनों के लिए मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की पीड़ा बन जाता है.

सरकारी सख्ती, निजी छूट?

मरीजों का कहना है कि जब सरकारी ब्लड बैंक में देरी होती है, तो वे निजी ब्लड बैंक की ओर रुख करते हैं. लेकिन देवघर में पंजीकृत निजी ब्लड बैंकों की संख्या भी सीमित है. निजी संचालकों का दावा है कि उन्हें नेट जांच को लेकर कोई स्पष्ट निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है और वे एलिसा जांच के आधार पर रक्त उपलब्ध कराते हैं.

समाधान अब भी लंबित

देवघर के सिविल सर्जन डॉ. बच्चा सिंह ने कहा कि जिला प्रशासन राज्य सरकार के आदेश का पालन कर रहा है और सरकारी ब्लड बैंक में बिना नेट जांच के रक्त नहीं दिया जाएगा. निजी ब्लड बैंकों के संदर्भ में स्पष्ट दिशा-निर्देश की जानकारी उन्हें नहीं है.