Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
झारखंड में बदला मौसम का मिजाज! धनबाद, बोकारो समेत 12 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, जानें रांची का ह... दुमका: बिहार के बेगूसराय से स्केटिंग कर देवघर और बासुकीनाथ धाम पहुँचे दो युवक, देखने के लिए उमड़ी भी... हजारीबाग: 16.32 लाख में से 13.52 लाख मतदाताओं का डिजिटलाइजेशन पूरा, BLO के पास 4 सितंबर तक जमा करें ... रांची: जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में सीबीआई जांच की मांग पर अड़े छात्र, सामाजिक संगठनों ने संभाला भो... धनबाद IIT-ISM के प्रो. आलोक सिन्हा की नई खोज: 20 साल के लिए पेटेंट हुई अपशिष्ट जल शोधन की आधुनिक तकन... लातेहार में हरियाली की बहार! वन विभाग लगा रहा 15 लाख पौधे, रोड साइड प्लांटेशन से संवरेंगी सड़कें देवघर श्रावणी मेले में आधुनिक तकनीक का जादू: 3D एनिमेशन से जीवंत हुई बाबा बैद्यनाथ धाम की पौराणिक कथ... पलामू पुलिस की बड़ी कार्रवाई: हथियार डीलर समेत 4 अपराधी गिरफ्तार, 2 देसी कट्टे और गोलियां बरामद धनबाद के बैंक मोड़ में शांति भवन के बिजली मीटर में लगी आग! मची अफरा-तफरी, बड़ा हादसा टला बोकारो शिक्षा विभाग में बड़ा घोटाला: दिवंगत शिक्षक के नाम पर 14.65 लाख की अवैध निकासी, आरोपी शिक्षक ...

डोनाल्ड ट्रंप ने मध्यस्थता का प्रस्ताव दिया

मिस्र और इथियोपिता के बीच जारी विवाद में नया पेंच

वाशिंगटनः मिस्र और इथियोपिया के बीच नील नदी के जल बंटवारे को लेकर जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर मध्यस्थता की पेशकश की है। इस ताजा पहल के साथ, ट्रम्प ने अफ्रीका की सबसे लंबी नदी और इथियोपिया द्वारा निर्मित ग्रैंड इथियोपियन रिनैसेंस डैम से जुड़ी जटिल भू-राजनीतिक समस्या को सुलझाने की इच्छा जताई है।

नील नदी मिस्र की जीवनरेखा है, जो अपनी लगभग पूरी जल आपूर्ति के लिए इस पर निर्भर है। वहीं, इथियोपिया ने अपनी आर्थिक प्रगति और बिजली उत्पादन के लिए 5 अरब डॉलर की लागत से विशाल ‘ग्रैंड रेनेसां डैम’ का निर्माण किया है। मिस्र और पड़ोसी देश सूडान को डर है कि इस बांध से उनके हिस्से के पानी में कमी आएगी, जो उनके कृषि और जल सुरक्षा के लिए एक अस्तित्वगत खतरा बन सकता है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी को लिखे एक पत्र में स्पष्ट किया कि वह नील जल बंटवारे के मुद्दे को स्थायी रूप से हल करने के लिए अमेरिकी मध्यस्थता को फिर से शुरू करने के लिए तैयार हैं। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर भी इस पत्र को साझा करते हुए कहा कि अमेरिका का मानना है कि इस क्षेत्र का कोई भी देश नील नदी के बहुमूल्य संसाधनों पर एकतरफा नियंत्रण नहीं रख सकता।

ट्रम्प ने सुझाव दिया कि एक ऐसा फॉर्मूला तैयार किया जा सकता है जिससे मिस्र और सूडान को सूखे के समय भी पानी की आपूर्ति मिलती रहे, जबकि इथियोपिया अपनी अतिरिक्त बिजली इन देशों को बेच सके। उन्होंने चेतावनी भी दी कि इस विवाद को जल्द न सुलझाया गया तो यह सैन्य टकराव का रूप ले सकता है।

मिस्र और सूडान ने ट्रम्प के इस प्रस्ताव का स्वागत किया है। राष्ट्रपति अल-सीसी ने कहा कि वह मिस्र की जल सुरक्षा के प्रति ट्रम्प के इस ध्यान की सराहना करते हैं। सूडान के सैन्य प्रमुख जनरल अब्देल फतह अल-बुरहान ने भी इसे एक सकारात्मक कदम बताया है। हालांकि, इथियोपिया ने अब तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

इथियोपिया का रुख हमेशा से यही रहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपने संसाधनों का उपयोग करने के लिए स्वतंत्र है। यह पहल ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल की विदेश नीति की एक प्रमुख प्राथमिकता मानी जा रही है, जो अफ्रीका और मध्य पूर्व में स्थिरता लाने के उनके प्रयासों का हिस्सा है।