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विरोध को कुचलने के लिए इराकी मिलिशिया

ट्रंप की चेतावनी के बीच ही ईरान से दूसरी जानकारी आयी

दुबईः ईरान में जारी व्यापक जन-आक्रोश और हिंसक विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के लिए इस्लामी गणतंत्र प्रशासन ने अब एक नया और विवादित कदम उठाया है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, तेहरान ने अपने वफादार इराकी मिलिशिया को ईरान की धरती पर तैनात किया है ताकि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके।

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को गंभीर सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है। खुफिया जानकारी और स्थानीय चश्मदीदों के हवाले से खबर है कि करीब 5,000 इराकी मिलिशिया लड़ाके (जैसे कि कताइब हिज़्बुल्ला, नूजाबा और बद्र संगठन) धार्मिक तीर्थयात्रियों के वेश में बसों के जरिए ईरान में प्रवेश कर चुके हैं। बताया जा रहा है कि इन लड़ाकों को हमदान, अहवाज़ और तेहरान जैसे संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरानी शासन को डर है कि उसके अपने सुरक्षा बल (जैसे बासिज या पुलिस) स्थानीय नागरिकों और अपनों पर गोली चलाने में हिचकिचा सकते हैं। विदेशी लड़ाकों का उपयोग इसलिए किया जा रहा है क्योंकि उनका स्थानीय जनता से कोई भावनात्मक जुड़ाव नहीं है, जिससे वे बिना किसी संकोच के दमनकारी कार्रवाई कर सकें।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस संकट पर कड़ा रुख अपनाते हुए सोशल मीडिया पर घोषणा की है कि यदि ईरान ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी बंद नहीं की, तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका लॉक एंड लोडेड है और ईरानी शासन को इसकी भारी कीमत चुकानी होगी।

हालांकि ट्रम्प ने सीधी सैन्य कार्रवाई से फिलहाल दूरी बनाई है, लेकिन पेंटागन ने ईरानी परमाणु ठिकानों और मिसाइल साइटों की एक सूची उन्हें सौंपी है। अमेरिका का प्राथमिक उद्देश्य ईरान को रणनीतिक रूप से झुकने पर मजबूर करना है।

ईरान में इंटरनेट ब्लैकआउट के बावजूद जो खबरें बाहर आ रही हैं, वे भयावह हैं। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, प्रदर्शनों में अब तक 2,500 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और लगभग 18,000 लोगों को हिरासत में लिया गया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने इन प्रदर्शनों को बाहरी तत्वों द्वारा प्रायोजित आतंकवाद करार दिया है, जबकि संयुक्त राष्ट्र ने अत्यधिक बल प्रयोग पर गहरी चिंता जताई है। तेहरान में वर्तमान में मार्शल लॉ जैसी स्थिति है, जहां रात 8 बजे के बाद कर्फ्यू लगा दिया गया है और आसमान में ड्रोन से निगरानी की जा रही है।