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सीबीआई ने दो बैंक अधिकारियों को गिरफ्तार किया

फर्जी बैंक खाता खोलकर साइबर फ्रॉड के सहयोग का मामला

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: देश में बढ़ते डिजिटल वित्तीय अपराधों के विरुद्ध एक बड़ी कार्रवाई करते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो ने बुधवार, 24 दिसंबर 2025 को बैंकिंग क्षेत्र के दो अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। इन पर आरोप है कि इन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए संगठित साइबर अपराधियों के साथ मिलकर बड़ी संख्या में फर्जी खाते खोले और संचालित किए। इन खातों का प्राथमिक उद्देश्य वैश्विक और स्थानीय स्तर पर की गई साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त अवैध धन को सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित करना और उसे कानूनी तंत्र की नजरों से बचाना था।

आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी का विवरण गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान शालिनी सिन्हा और अभिषेक कुमार के रूप में हुई है। शालिनी सिन्हा केनरा बैंक में सहायक प्रबंधक के पद पर कार्यरत थीं, जबकि अभिषेक कुमार एक्सिस बैंक में बिजनेस डेवलपमेंट एसोसिएट के रूप में सेवाएं दे रहे थे।

दिलचस्प बात यह है कि ये दोनों ही अधिकारी बिहार की राजधानी पटना में तैनात थे, लेकिन सीबीआई ने इन्हें अलग-अलग राज्यों से दबोचा है। शालिनी सिन्हा को उत्तर प्रदेश के वाराणसी से हिरासत में लिया गया, वहीं अभिषेक कुमार को बिहार के बेतिया जिले से गिरफ्तार किया गया।

साजिश और क्विड प्रो क्वो का खुलासा सीबीआई की जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि ये बैंकर्स केवल खाते खोलने तक ही सीमित नहीं थे। जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों के फॉरेंसिक विश्लेषण से पता चला है कि वे सक्रिय रूप से साइबर जालसाजों का मार्गदर्शन कर रहे थे। वे अपराधियों को बैंकिंग सॉफ्टवेयर द्वारा उत्पन्न होने वाले रेड फ्लैग या चेतावनी संकेतों को चकमा देने की तकनीक सिखाते थे, ताकि संदिग्ध लेनदेन पकड़े न जाएं। इस मिलीभगत के बदले इन अधिकारियों को वित्तीय रिश्वत और अन्य लाभ प्राप्त हुए थे।

म्यूल अकाउंट्स वे खाते होते हैं जो अक्सर फर्जी दस्तावेजों या भोले-भाले लोगों के नाम पर खोले जाते हैं। अपराधी इनका उपयोग अवैध धन की लेयरिंग करने के लिए करते हैं ताकि पैसे के असली स्रोत का पता न चल सके।

सीबीआई ने इस बड़े नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए अब तक देश भर में 61 स्थानों पर छापेमारी की है। इस मामले में अब तक कुल 15 गिरफ्तारियां (इन दो बैंकर्स सहित) हो चुकी हैं और 13 के खिलाफ पहले ही चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। एजेंसी अब इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य उच्च-पदस्थ बैंक अधिकारियों की भूमिका की बारीकी से जांच कर रही है।