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12 साल की फरारी और नैटग्रिड का जाल काम आया

17 करोड़ के घोटालेबाज की गिरफ्तारी

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: आधुनिक तकनीक और एकीकृत खुफिया तंत्र के इस दौर में अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, कानून के लंबे हाथों से बचना नामुमकिन होता जा रहा है। इसका ताजा उदाहरण तब देखने को मिला जब केंद्रीय जांच ब्यूरो ने करीब 12 साल से एक अदृश्य साये की तरह रह रहे भगोड़े आशुतोष पंडित को गिरफ्तार कर लिया।

हाउस ऑफ लैपटॉप्स के निदेशक आशुतोष पंडित पर आरोप है कि उसने 2013 में पुणे में इंडियन ओवरसीज बैंक के साथ 17 करोड़ रुपये की बड़ी धोखाधड़ी को अंजाम दिया था। इस घोटाले के बाद वह रहस्यमयी तरीके से गायब हो गया, जिसके बाद 2018 में एक अदालत ने उसे आधिकारिक तौर पर भगोड़ा घोषित कर दिया था।

पंडित की फरारी किसी हॉलीवुड फिल्म की पटकथा जैसी थी। उसने खुद को कानून की नजरों से बचाने के लिए गोवा के बाम्बोलिम के एक शांत इलाके में पनाह ली और अपनी पुरानी पहचान को पूरी तरह त्याग दिया। वहां के स्थानीय निवासियों और पड़ोसियों के लिए वह कोई जालसाज नहीं, बल्कि यतिन शर्मा नाम का एक सभ्य और कानून का पालन करने वाला नागरिक था।

अपनी नई पहचान को पुख्ता करने के लिए उसने जाली दस्तावेजों के आधार पर आधार कार्ड और पैन कार्ड तक बनवा लिए थे। हद तो तब हो गई जब उसने इस फर्जी नाम से दिल्ली से पासपोर्ट हासिल किया और उसके समाप्त होने पर गोवा पासपोर्ट कार्यालय से उसे नवीनीकृत भी करवा लिया।

पिछले 12 सालों से ये जाली दस्तावेज उसके लिए एक अभेद्य सुरक्षा कवच बने हुए थे, जिसने पुणे की कानूनी मशीनरी को पूरी तरह उलझा रखा था। हालांकि, सीबीआई ने उसका पीछा कभी नहीं छोड़ा। अंततः जांच एजेंसी को यह बड़ी सफलता किसी मुखबिर की सूचना से नहीं, बल्कि नैटग्रिड पोर्टल के डिजिटल जाल से मिली।

इस एकीकृत खुफिया ढांचे ने डेटा पैटर्न में कुछ बहुत ही बारीक विसंगतियों को पकड़ा। जब जांचकर्ताओं ने तकनीकी साक्ष्यों और नैटग्रिड द्वारा जनरेट किए गए इनपुट्स का मिलान किया, तो यतिन शर्मा का मुखौटा उतर गया और उसके डिजिटल पदचिह्न सीधे बाम्बोलिम तक जा पहुंचे।

सीबीआई के अधिकारियों ने एक सटीक और समन्वित छापेमारी करते हुए उसे उसके आवास से धर दबोचा। यह गिरफ्तारी उस मामले में एक निर्णायक मोड़ लेकर आई है जो 2013 से ठंडे बस्ते में पड़ा नजर आ रहा था। एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि आज के डिजिटल युग में किसी भी परफेक्ट एस्केप या फरारी की एक एक्सपायरी डेट होती है।