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केरल सरकार की केंद्रीय चुनाव आयोग से अपील की

मतदाता सूची पुनरीक्षण की समय सीमा बढ़ाएं

राष्ट्रीय खबर

तिरुवनंतपुरम: केरल सरकार ने राज्य में चल रही मतदाता सूची की प्रक्रिया में गंभीर खामियों की ओर इशारा करते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्य सचिव ए. जयतिलक ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को एक आधिकारिक पत्र भेजकर विशेष गहन पुनरीक्षण गणना फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि को कम से कम 2 सप्ताह और आगे बढ़ाने का पुरजोर अनुरोध किया है। केरल में इस गणना चरण की समय सीमा 18 दिसंबर को समाप्त हो चुकी थी और कार्यक्रम के अनुसार 23 दिसंबर को मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित की जानी है।

मुख्य सचिव ने अपने पत्र में इस बात पर जोर दिया कि केवल राज्य सरकार ही नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट और केरल के लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने भी इस समय सीमा को बढ़ाने की आवश्यकता जताई है। पत्र में साझा किए गए आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं। केरल में कुल 2,78,50,855 गणना फॉर्म वितरित किए जाने थे, जिनमें से लगभग 24,08,503 फॉर्म (करीब 8.65 प्रतिशत) असंग्रहित या अनकलेक्टेड रह गए हैं। चुनाव आयोग के मौजूदा नियमों के अनुसार, जिन नागरिकों ने ये फॉर्म वापस नहीं किए हैं, उनके नाम आगामी मसौदा सूची में शामिल नहीं किए जाएंगे। इससे राज्य के लाखों पात्र मतदाताओं के मताधिकार छिनने का एक बड़ा संकट पैदा हो गया है।

इस प्रक्रिया की विसंगतियों का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि राज्य की कई जानी-मानी हस्तियों के नाम भी मतदाता सूची से गायब मिले हैं। इनमें तिरुवल्ला के विधायक और पूर्व मंत्री मैथ्यू टी थॉमस, सीपीआई के दिग्गज नेता राजाजी मैथ्यू और केरल के पूर्व डीजीपी रमन श्रीवास्तव जैसे नाम शामिल हैं। मुख्य सचिव ने केरल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी रतन यू केलकर के उस दावे को भी सिरे से खारिज कर दिया कि बूथ स्तर के अधिकारी राज्य के सभी 2.79 करोड़ मतदाताओं तक पहुंचने में सफल रहे थे।

पत्र में आरोप लगाया गया है कि जिन फॉर्मों को वितरित नहीं किया जा सका, उनकी सूची न तो सार्वजनिक की गई और न ही राजनीतिक दलों को उपलब्ध कराई गई। एक हैरान करने वाला उदाहरण तिरुवनंतपुरम के श्रीवराहम के एक बूथ का दिया गया, जहां कुल 1200 मतदाताओं में से 704 के फॉर्म अस्वीकृत श्रेणी में डाल दिए गए। यह अनुपात सामान्य से कहीं अधिक है और डेटा की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है। सरकार का तर्क है कि यदि समय सीमा नहीं बढ़ाई गई, तो 2021 के विधानसभा चुनाव में मतदान करने वाले हजारों वैध नागरिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया से बाहर हो जाएंगे।