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बंगाल में एसआईआर के नाम पर मजाक चल रहा है

ममता ने ज्ञानेश कुमार को फिर लिखा पत्र

राष्ट्रीय खबर

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री  ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को एक कड़ा पत्र लिखकर बंगाल में चल रहे एसआईआर अभियान को एक प्रहसन करार दिया है। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी है कि जिस तरह से यह प्रक्रिया अपनाई जा रही है, उससे वास्तविक मतदाताओं के मताधिकार छिनने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। 3 जनवरी की तारीख वाला यह चार पन्नों का पत्र रविवार को मीडिया में साझा किया गया। 20 नवंबर के बाद से यह तीसरी बार है जब ममता बनर्जी ने इस अभ्यास पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराते हुए चुनाव आयोग को पत्र लिखा है।

ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि एसआईआर अभियान को बिना किसी ठोस योजना, खराब तैयारी और तदर्थ तरीके से चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सुधारात्मक कदम उठाने के बजाय, चुनाव आयोग ने जमीनी स्तर पर स्थिति को और बिगड़ने दिया है। पत्र में मुख्यमंत्री ने लिखा, एसआईआर जिस अनुचित जल्दबाजी में आयोजित किया जा रहा है, उसने पूरी प्रक्रिया को मौलिक रूप से त्रुटिपूर्ण बना दिया है।

इस संवेदनशील संवैधानिक जिम्मेदारी के लिए अधिकारियों को कोई उचित या समान प्रशिक्षण नहीं दिया गया है। इस्तेमाल किए जा रहे आईटी सिस्टम दोषपूर्ण और अविश्वसनीय हैं, और समय-समय पर जारी निर्देश विरोधाभासी हैं। उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर भी चुनाव आयोग इसके उद्देश्यों और अंतिम लक्ष्यों को लेकर अनिश्चित दिखाई दे रहा है।

मुख्यमंत्री ने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि महत्वपूर्ण निर्देश औपचारिक अधिसूचनाओं या परिपत्रों के बजाय अनौपचारिक रूप से व्हाट्सएप और टेक्स्ट संदेशों के माध्यम से जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसी मनमानी से सटीकता और पारदर्शिता की कोई गुंजाइश नहीं बचती, जिससे वास्तविक मतदाताओं के नाम कटने की संभावना बढ़ जाती है। ममता बनर्जी ने आईटी प्रणालियों के दुरुपयोग के माध्यम से ‘बैकएंड’ से मतदाताओं को हटाने का भी गंभीर आरोप लगाया, जिसकी जानकारी वैधानिक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों तक को नहीं है।

जमीनी हकीकत का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि बुजुर्गों और गंभीर रूप से बीमार नागरिकों को सुनवाई के लिए 20-25 किलोमीटर दूर यात्रा करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। साथ ही, एक गुप्त एल्गोरिदम के जरिए लाखों मतदाताओं को संदिग्ध श्रेणी में डाल दिया गया है।

उन्होंने सूक्ष्म-पर्यवेक्षकों की नियुक्ति और सुनवाई के दौरान बूथ स्तर के एजेंटों को अनुमति न देने पर भी सवाल उठाए। मुख्यमंत्री ने मांग की कि यदि इन त्रुटियों को तुरंत ठीक नहीं किया गया, तो इस अनियोजित और मनमानी प्रक्रिया को तुरंत रोक दिया जाना चाहिए, अन्यथा यह लोकतांत्रिक शासन के सिद्धांतों पर सीधा हमला होगा।