Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Bhind Crime News: भिंड में दूल्हा बनने से पहले गिरफ्तार हुआ 37 लाख की चोरी का इनामी आरोपी बलदेव गोले Supreme Court AI Draft 2026: अदालतों में AI के इस्तेमाल के लिए सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया ड्राफ्ट; 2... TMC Crisis 2026: ममता बनर्जी की TMC में सबसे बड़ी बगावत; 58 विधायकों के साथ ऋतब्रत बनर्जी ने ठोका 'अ... Ghaziabad Hotel Death: गाजियाबाद के 'अंश होटल' में फंदे से लटकी मिली युवती की लाश; प्रेमी को पुलिस न... Lords Test: 27 महीने बाद लौटे ऑली रोबिन्सन का महा-कमबैक; पहले ही ओवर में 3 विकेट लेकर मचाया तहलका Karuppu Box Office Collection: 300 करोड़ के क्लब से चंद कदम दूर सूर्या की 'करुप्पु'; अकेले तमिलनाडु ... Russia-Ukraine War: जेलेंस्की ने पुतिन को लिखा खुला पत्र, 'बहुत हुआ युद्ध, स्विट्जरलैंड या तुर्किये ... RBI MPC Meeting 2026: आरबीआई ने घटाया GDP ग्रोथ का अनुमान, FY27 में 6.9% की जगह 6.6% की रफ्तार से बढ... ASUS WiFi 8 Router: आसुस ने लॉन्च किया दुनिया का पहला Wi-Fi 8 राउटर; मिलेगी 30Gbps की सुपरफास्ट स्पी... Adhik Maas Kala Ashtami 2026: 3 साल बाद आया अधिक मास कालाष्टमी का महासंयोग; 8 जून को भूलकर भी न करें...

चुनाव आयोग के एसआईआर का दांव शायद उल्टा पड़ गया

बंगाल में भाजपा के वोटर ही ज्यादा हटाये गये

  • सुवेंदु अधिकारी की सीट पर कमाल

  • भाजपा की जीत के अंतर से ज्यादा

  • आंकड़ों से भाजपा का नुकसान दिख रहा

राष्ट्रीय खबर

कोलकाताः पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। चुनाव आयोग द्वारा हाल ही में प्रकाशित मतदाता सूची के प्रारूप (ड्राफ्ट रोल) के विश्लेषण से ऐसे आंकड़े सामने आए हैं, जो आगामी विधानसभा चुनावों के समीकरणों को पूरी तरह बदल सकते हैं। डेटा से पता चलता है कि राज्य की आधी से अधिक उन सीटों पर, जहाँ 2021 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की थी, हटाए गए मतदाताओं की संख्या भाजपा की जीत के अंतर से कहीं अधिक है।

सबसे चौंकाने वाला उदाहरण नंदीग्राम की हाई-प्रोफाइल सीट का है। यहाँ 2021 में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बेहद कड़े मुकाबले में 1,956 मतों से हराया था। हालांकि, ताज़ा ड्राफ्ट रोल के अनुसार, इस निर्वाचन क्षेत्र से 10,599 मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। यह संख्या जीत के अंतर से लगभग पांच गुना अधिक है। चुनाव आयोग द्वारा चलाए गए विशेष गहन संशोधन अभियान के तहत अब तक पूरे बंगाल में लगभग 58 लाख नाम मतदाता सूची से काटे जा चुके हैं।

भाजपा के गढ़ों में बड़ी कटौती आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि भाजपा द्वारा जीती गई 77 सीटों में से 42 सीटों पर हटाए गए मतदाताओं (मृत, लापता या स्थायी रूप से स्थानांतरित) की संख्या जीत के मार्जिन से ज्यादा है। उत्तर बंगाल, जो 2019 के बाद से भाजपा का मजबूत किला रहा है, वहां भी स्थिति गंभीर है। कूचबिहार उत्तर, कूचबिहार दक्षिण और दिनहाटा जैसी सीटों पर हटाए गए नामों की संख्या हजारों में है, जबकि यहाँ जीत का अंतर काफी कम था। दक्षिण बंगाल के औद्योगिक क्षेत्र जैसे आसनसोल दक्षिण और कुल्टी में भी यही स्थिति देखी गई है, जहाँ कुल्टी में जीत का अंतर मात्र 679 था, जबकि 13,000 से अधिक नाम हटाए गए हैं।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप बंगाल भाजपा अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद समिक भट्टाचार्य ने इस प्रक्रिया का स्वागत करते हुए इसे शुद्धिकरण करार दिया है। उनका तर्क है कि ये वे फर्जी मतदाता थे जिनका इस्तेमाल सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पिछले चुनावों में चुनावी धांधली के लिए करती रही है। उन्होंने दावा किया कि अंतिम सूची आने के बाद टीएमसी का चुनावी आधार कमजोर होगा।

हालांकि, भाजपा के भीतर ही इसे लेकर अलग सुर भी सुनाई दे रहे हैं। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने चिंता व्यक्त की है कि खड़गपुर सदर जैसे शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर हुए पलायन के कारण हटाए गए नामों का खामियाजा भाजपा को भुगतना पड़ सकता है। उनका मानना है कि रोजगार की कमी के कारण पलायन करने वाले लोग अक्सर भाजपा के समर्थक रहे हैं। अब सबकी नजरें फरवरी में प्रकाशित होने वाली अंतिम मतदाता सूची पर टिकी हैं, जो बंगाल की भविष्य की राजनीतिक दिशा तय करेगी।