साझा दुश्मन भाजपा के खिलाफ एकजुट हों
राष्ट्रीय खबर
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के राजनीतिक क्षितिज पर एक बार फिर बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो और राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को एक बेहद महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश देते हुए राज्य के सभी विपक्षी दलों से वैचारिक मतभेदों को भुलाकर एक साझा मंच पर आने की अपील की है। यह आह्वान विशेष रूप से भारतीय जनता पार्टी के विरुद्ध किया गया है, जिसने हाल ही में संपन्न 2026 के विधानसभा चुनावों में प्रचंड जीत हासिल कर राज्य की सत्ता से टीएमसी को बेदखल कर दिया है।
रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती के पावन अवसर पर अपने कालीघाट स्थित आवास के बाहर समर्थकों की एक सीमित सभा को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने राजनीति के पुराने समीकरणों को नया आयाम देने की कोशिश की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब समय आ गया है जब उन सभी ताकतों को एक साथ आना चाहिए जो भाजपा की विचारधारा के विरुद्ध हैं। उन्होंने विशेष रूप से वामपंथियों और अति-वामपंथियों का नाम लेते हुए उन्हें इस साझा मोर्चे का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया।
ममता ने एक कड़ा संदेश देते हुए कहा, यह समय यह सोचने का नहीं है कि दुश्मन का दुश्मन मेरा दोस्त है; हमें यह समझना होगा कि हमारा सबसे बड़ा और प्राथमिक मुकाबला भाजपा से है। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर के दलों से भी इस क्षेत्रीय संघर्ष में सहयोग देने की अपील की। राजनीतिक दलों के अलावा, ममता बनर्जी ने अपनी रणनीति में छात्र समुदायों और नागरिक समाज को भी शामिल किया है। उन्होंने भाजपा विरोधी विभिन्न विचारधाराओं वाले छात्र संघों से आग्रह किया कि वे भगवा खेमे के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए एकजुट हों। उन्होंने संवाद के द्वार खुले रखते हुए कहा कि यदि कोई भी राजनीतिक दल इस विषय पर चर्चा करना चाहता है, तो वे बातचीत के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
संबोधन के दौरान ममता बनर्जी ने राज्य की वर्तमान कानून-व्यवस्था पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव के परिणामों की घोषणा के बाद से ही राज्य के विभिन्न हिस्सों में टीएमसी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा, राज्य में कई जगहों पर गुंडागर्दी और अराजकता का माहौल है। ऐसा प्रतीत होता है कि भाजपा के रैंकों में असामाजिक तत्व घुस गए हैं जो हिंसा को बढ़ावा दे रहे हैं।
अपने शासनकाल की तुलना करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि जब वे 2011 में पहली बार सत्ता में आई थीं, तब उन्होंने किसी भी विपक्षी दल के कार्यकर्ता के विरुद्ध अत्याचार की अनुमति नहीं दी थी।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह बदलाव ऐतिहासिक है। 294 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा ने 207 सीटों के साथ बहुमत हासिल कर राज्य में अपनी पहली सरकार बनाई है। दूसरी ओर, 2011 से सत्ता पर काबिज रही तृणमूल कांग्रेस मात्र 80 सीटों पर सिमट गई है। इस चुनावी हार के बाद ममता बनर्जी अब फिर से अपनी जमीन तलाशने और एक व्यापक गठबंधन बनाने की दिशा में सक्रिय हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता की यह अपील बंगाल की राजनीति में वाम और तृणमूल के बीच के दशकों पुराने कड़वे रिश्तों को भाजपा के विरुद्ध एक नए गठजोड़ में बदलने की कोशिश हो सकती है।