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कोलकाता में फिर से ममता बनर्जी को केंद्रीय गृह मंत्री की चुनौती

बंगाल को घुसपैठियों से मुक्त करेंगे: अमित शाह

  • प्रेस कांफ्रेंस में ममता सरकार पर आरोप

  • घुसपैठ को राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा कहा

  • उनके मुताबिक जनता बदलाव चाहती है

राष्ट्रीय खबर

कोलकाताः केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की कोलकाता यात्रा ने पश्चिम बंगाल की राजनीतिक तपिश को चरम पर पहुँचा दिया है। मंगलवार को आयोजित एक विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शाह ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार के खिलाफ चार्जशीट पेश करते हुए आगामी विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा का एजेंडा स्पष्ट कर दिया। उनके संबोधन के केंद्र में तीन प्रमुख मुद्दे रहे: भ्रष्टाचार, सुरक्षा और घुसपैठ।

अमित शाह ने घुसपैठ को केवल बंगाल की समस्या नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बताया। उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि ममता बनर्जी वोट बैंक की राजनीति के कारण बांग्लादेशी घुसपैठ को बढ़ावा दे रही हैं। शाह ने घोषणा की कि यदि भाजपा सत्ता में आती है, तो वह हर एक घुसपैठिये की पहचान कर उसे राज्य से बाहर करेगी। उन्होंने एक तकनीकी बाधा का भी उल्लेख किया कि राज्य सरकार द्वारा भूमि उपलब्ध न कराए जाने के कारण बांग्लादेश सीमा पर कटीले तारों की बाड़ लगाने का काम अधूरा पड़ा है, जिसे भाजपा सरकार प्राथमिकता के आधार पर पूरा करेगी।

अमित शाह ने पिछले 15 वर्षों के टीएमसी शासन को अंधकार युग बताते हुए कहा कि राज्य ने केवल डर, सिंडिकेट राज और भ्रष्टाचार देखा है। उन्होंने कहा कि केंद्र की जन-कल्याणकारी योजनाएं बंगाल में तोलाबाजी (जबरन वसूली) की भेंट चढ़ जाती हैं। शाह के अनुसार, अब बंगाल की जनता इस दमनकारी शासन से मुक्ति चाहती है और बदलाव का मूड बना चुकी है।

सांस्कृतिक पुनरुत्थान और चुनावी गणित शाह ने सोनार बांग्ला के विचार को दोहराते हुए कहा कि भाजपा का लक्ष्य स्वामी विवेकानंद, रवींद्रनाथ टैगोर और श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों का बंगाल बनाना है। उन्होंने आंकड़ों के जरिए भाजपा की बढ़ती शक्ति का प्रदर्शन किया—कैसे पार्टी 2016 में केवल 3 सीटों से बढ़कर 2021 में 77 सीटों तक पहुँची। उन्होंने दावा किया कि 15 अप्रैल 2026 के बाद जब बंगाल में भाजपा की सरकार बनेगी, तब राज्य के खोए हुए गौरव और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की शुरुआत होगी। शाह के इस तीखे चुनावी शंखनाद ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी विधानसभा चुनाव ध्रुवीकरण और विकास के मुद्दों पर केंद्रित रहेंगे।