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पूरे कार्बी आंगलोंग से निषेधाज्ञा हटाई गई

असम के पहाड़ी क्षेत्र में अब माहौल में सुधार नजर आया

  • जमीन को लेकर भड़की थी हिंसा

  • झड़प में दो लोगों की जान गयी

  • त्रिपक्षीय वार्ता से समस्या हल हुई

उत्तर पूर्व संवाददाता

गुवाहाटीः असम के पहाड़ी जिलों, कार्बी आंगलोंग और पश्चिम कार्बी आंगलोंग में पिछले एक सप्ताह से जारी तनाव के बाद अब शांति की किरण दिखाई दी है। प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 (जो पूर्व में धारा 144 के समान थी) के तहत लगाए गए सभी प्रतिबंधों को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया है। यह निर्णय क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था की गहन समीक्षा और शांति के सकारात्मक संकेतों के बाद लिया गया है।

हिंसा की पृष्ठभूमि और प्रशासनिक कार्रवाई गौरतलब है कि इस अशांति की शुरुआत 22 दिसंबर को हुई थी, जब पश्चिम कार्बी आंगलोंग के खेरोनी क्षेत्र में भूमि विवाद को लेकर हिंसा भड़क उठी थी। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और स्थानीय गुटों के बीच हुई झड़पों में आगजनी की गंभीर घटनाएं हुईं, जिसमें दुर्भाग्यवश दो लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। स्थिति को अनियंत्रित होने से बचाने के लिए जिला प्रशासन ने रात का कर्फ्यू लागू किया था और पाँच या उससे अधिक व्यक्तियों के इकट्ठा होने पर पाबंदी लगा दी थी। निजी वाहनों की आवाजाही पर भी रात के समय कड़े प्रतिबंध थे।

शांति बहाली के प्रयास और त्रिपक्षीय वार्ता पिछले कुछ दिनों में असम सरकार और कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद ने स्थिति को संभालने के लिए सक्रिय भूमिका निभाई। उच्च स्तरीय बैठकों और त्रिपक्षीय वार्ताओं के माध्यम से हिंसा से प्रभावित लोगों के पुनर्वास, मुआवजे और अतिक्रमण विरोधी अभियानों पर विस्तृत चर्चा की गई। प्रशासन के इन हस्तक्षेपों और स्थानीय शांति समितियों की सक्रियता के कारण ही एक सप्ताह के भीतर हालात नियंत्रण में आ सके।

नए साल का जश्न और सतर्कता की अपील जिलाधिकारियों ने निषेधाज्ञा हटाने के पीछे एक प्रमुख कारण आगामी न्यू ईयर (नया साल 2026) के उत्सव को भी बताया है। प्रशासन चाहता है कि नागरिक बिना किसी डर के शांतिपूर्ण तरीके से नववर्ष का स्वागत कर सकें। हालांकि, प्रतिबंध हटने का मतलब सुरक्षा में ढील देना नहीं है। प्रशासन ने साफ किया है कि सुरक्षा एजेंसियां अब भी सतर्क हैं और किसी भी प्रकार की अफवाह या अराजकता फैलाने वाले तत्वों पर कड़ी नजर रखी जाएगी। निवासियों से अपील की गई है कि वे सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखें और क्षेत्र की स्थिरता सुनिश्चित करने में पुलिस का सहयोग करें।