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कांग्रेस नेता अधीर रंजन ने पीएम मोदी से भेंट की

विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बंगाल की राजनीति में नई चर्चा

  • औपचारिक तौर पर एसआईआर पर चर्चा

  • टीएमसी और भाजपा से समान दूरी पर

  • बंगालियों के उत्पीड़न का मुद्दा उठाया

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों की आहट के बीच दिल्ली के गलियारों में हुई एक मुलाकात ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पश्चिम बंगाल कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके आधिकारिक आवास पर मुलाकात की। हालांकि इस बैठक को औपचारिक बताया जा रहा है, लेकिन इसके समय और चर्चा के विषयों ने इसे राजनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बना दिया है।

बैठक का सबसे प्रमुख मुद्दा चुनाव आयोग द्वारा बंगाल में चलाया जा रहा विशेष गहन संशोधन कार्यक्रम रहा। अधीर रंजन चौधरी ने प्रधानमंत्री के सामने उन आशंकाओं को रखा जो वर्तमान में बंगाल के मतदाताओं के बीच व्याप्त हैं। दरअसल, चुनाव आयोग उन मतदाताओं की जांच कर रहा है जिनका मिलान 2002 की मतदाता सूची से नहीं हो पा रहा है। इस प्रक्रिया के कारण राज्य के लगभग 32 लाख लोग जांच के दायरे में हैं। चौधरी ने इस प्रक्रिया से आम नागरिकों, विशेषकर बुजुर्गों और ग्रामीण आबादी को होने वाली परेशानियों और डिटेंशन के डर को प्रधानमंत्री के समक्ष प्रमुखता से उठाया।

बंगाली भाषियों की सुरक्षा का प्रश्न प्रधानमंत्री के साथ चर्चा में अधीर रंजन चौधरी ने देश के विभिन्न राज्यों में बंगाली भाषी लोगों के खिलाफ हो रही छिटपुट हिंसा और उत्पीड़न की घटनाओं पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने आग्रह किया कि भाषाई आधार पर किसी भी नागरिक को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए और केंद्र सरकार को उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए।

राजनीतिक मायने और चुनावी संदर्भ यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब बंगाल में तृणमूल कांग्रेस इस एसआईआर प्रक्रिया को नागरिकता छीनने की साजिश बताकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन कर रही है। अधीर रंजन चौधरी, जो अक्सर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मुखर आलोचक रहे हैं, का प्रधानमंत्री से मिलना बंगाल में त्रिकोणीय मुकाबले या नए राजनीतिक समीकरणों की ओर इशारा करता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चौधरी इस मुद्दे पर कांग्रेस की अलग भूमिका तय करना चाहते हैं, ताकि वे टीएमसी और भाजपा दोनों से इतर अपनी बात रख सकें।

आगामी मार्च-अप्रैल 2026 के चुनावों से पहले, मतदाता सूची का यह मुद्दा बंगाल में सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनता दिख रहा है। प्रधानमंत्री और अधीर रंजन चौधरी की यह बातचीत संकेत देती है कि आने वाले दिनों में केंद्र सरकार और चुनाव आयोग इस प्रक्रिया में कुछ और रियायतें या स्पष्टीकरण जारी कर सकते हैं ताकि जनता के बीच फैले भ्रम को दूर किया जा सके।