Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Chhattisgarh Weather: छत्तीसगढ़ में गर्मी का 'रेड अलर्ट', मध्य छत्तीसगढ़ में 44 डिग्री के करीब पहुंच... MP POCSO Cases: मध्य प्रदेश में न्याय की सुस्त रफ्तार, पॉक्सो ट्रायल में लग रहे 380 दिन; 10 हजार से ... MP Police New Rules: मध्य प्रदेश में अब पुलिस नहीं कर पाएगी मनमानी, गिरफ्तारी का लिखित आधार देना अनि... Guna Railway Update: अंडरब्रिज में पानी भरते ही बज उठेगा अलार्म, गुना में रेलवे का हाईटेक प्रयोग; CC... जमानत पर छूटे अपहरण के आरोपी की बेरहमी से हत्या, पीड़िता के परिवार ने फोड़ डाली आंखें; कुएं में फेंक... Ujjain News: नारी शक्ति वंदन अधिनियम की खुशी में महिलाओं का 'चौका-छक्का', उज्जैन में आयोजित हुई अनोख... MP Weather Alert: मध्य प्रदेश में 43 डिग्री के साथ नर्मदापुरम सबसे गर्म, भीषण गर्मी के कारण बदला स्क... MP Road Revolution: नर्मदापुरम से खुलेगा दिल्ली-मुंबई का सीधा रास्ता, मध्य प्रदेश में सड़क क्रांति स... MP News: मध्यप्रदेश में अब नहीं जलेगी पराली, मल्चर मशीन से खाद बनेगी फसल के अवशेष; जानें कैसे बढ़ेगी ... Dewas: देवास में अचानक हथौड़ा लेकर क्यों दौड़े कलेक्टर ऋषव गुप्ता? सामने आई इसके पीछे की ये दिलचस्प ...

चुनाव आयोग के एसआईआर की असलियत सामने आयी

तृणमूल सांसद के परिवार को भी नोटिस जारी

  • काकोली घोष दस्तीदार का परिवार

  • बारासत सीट से सांसद हैं वह

  • यह परेशान करने वाली हरकत

राष्ट्रीय खबर

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन की प्रक्रिया ने एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है। बारासात से तृणमूल कांग्रेस एमपी की वरिष्ठ सांसद डॉ. काकोली घोष दस्तीदार ने भारतीय चुनाव आयोग पर उन्हें और उनके परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और जानबूझकर परेशान करने का गंभीर आरोप लगाया है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब सांसद की 90 वर्षीय वयोवृद्ध माता, उनके दो डॉक्टर बेटों और उनकी बहन का नाम मतदाता सूची के नए मसौदे से गायब पाया गया।

नाम कटने के बाद, चुनाव आयोग ने उनके परिवार को भौतिक सुनवाई के लिए तलब किया है। डॉ. दस्तीदार ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जो परिवार दशकों से भारत का नागरिक है और लगातार मतदान करता आ रहा है, उसे अचानक अपनी नागरिकता और वोटिंग अधिकार साबित करने के लिए बुलाना अपमानजनक है।

उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग पूरी तरह से भाजपा के इशारे पर काम कर रहा है और विपक्ष के मजबूत आधार वाले क्षेत्रों से वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया, जब एक मौजूदा सांसद और पूर्व राज्य मंत्री के परिवार के साथ ऐसा व्यवहार हो सकता है, तो राज्य की आम जनता और गरीब तबके की स्थिति क्या होगी, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

पूरे पश्चिम बंगाल में लगभग 32 लाख ऐसे मतदाताओं को नोटिस जारी किया गया है जिन्हें अनमैप्ड (unmapped) की श्रेणी में रखा गया है। ये वे मतदाता हैं जिनका मिलान वर्ष 2002 की पुरानी मतदाता सूची से नहीं हो पाया है। राज्य की सभी 294 विधानसभा सीटों पर शनिवार से 3,234 केंद्रों पर यह विशाल सुनवाई प्रक्रिया शुरू हुई है। इस पूरी कवायद की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए 4,500 से अधिक माइक्रो-ऑब्जर्वर तैनात किए गए हैं।

दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक प्रशासनिक प्रक्रिया बताया है। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राहुल सिन्हा ने कहा कि दस्तावेजों में तकनीकी विसंगति या डेटा मिसमैच होने पर आयोग स्पष्टीकरण मांगता है। उन्होंने कहा, इसमें कोई साजिश नहीं है, 30 लाख से ज्यादा लोगों को नोटिस मिला है, उन्हें बस अपनी पहचान स्पष्ट करनी है। गौरतलब है कि आयोग ने पहचान के लिए 12 वैकल्पिक दस्तावेजों को अनुमति दी है, हालांकि केवल आधार कार्ड को नागरिकता या पते का पर्याप्त प्रमाण नहीं माना जा रहा है। टीएमसी इस प्रक्रिया को भाजपा की वोट चोरी की साजिश बता रही है, जबकि आयोग का कहना है कि यह सूची को त्रुटिहीन बनाने का एक प्रयास है।