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वेनेजुएला में अमेरिकी ऑपरेशन पर भारत ने जताई गहरी चिंता

कूटनीतिक समस्या के शांतिपूर्ण समाधान की अपील

नईदिल्लीः भारत ने रविवार को वेनेजुएला में विकसित हो रही गंभीर स्थिति और वहां हाल ही में हुए अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन के बाद अपनी पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी की है। गौरतलब है कि 3 जनवरी की देर रात वेनेजुएला की राजधानी काराकस में अमेरिकी विशेष बलों द्वारा एक बड़ा छापेमारी अभियान चलाया गया था।

इस ऑपरेशन के बाद से ही राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स की सुरक्षा और उनकी स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी अनिश्चितता और तनाव का माहौल बना हुआ है। इस संवेदनशील घटनाक्रम पर भारत सरकार ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

भारतीय विदेश मंत्रालय द्वारा रविवार को जारी किए गए एक औपचारिक बयान में कहा गया कि लैटिन अमेरिकी देश वेनेजुएला में हो रहे हालिया घटनाक्रम गहरी चिंता का विषय हैं। मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह स्पष्ट किया कि भारत सरकार इस तेजी से बदलती और अस्थिर होती स्थिति पर बहुत बारीकी से नजर रख रही है।

भारत का हमेशा से यह कूटनीतिक रुख रहा है कि किसी भी राष्ट्र की आंतरिक संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना अनिवार्य है। भारत का मानना है कि वहां उत्पन्न होने वाले किसी भी राजनीतिक विवाद या जटिल मुद्दे को बाहरी बल प्रयोग या सैन्य हस्तक्षेप के बजाय केवल शांतिपूर्ण संवाद, आपसी समझ और कूटनीतिक रास्तों से ही सुलझाया जाना चाहिए।

क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का विश्लेषण है कि भारत की यह सधी हुई प्रतिक्रिया उसकी संतुलित विदेश नीति के सिद्धांत को प्रतिबिंबत करती है। भारत एक तरफ लोकतांत्रिक मूल्यों का समर्थन करता है, तो दूसरी तरफ वैश्विक स्थिरता और राष्ट्रों की स्वायत्तता के बीच समन्वय बनाने का प्रयास करता है। वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देशों में से एक है, इसलिए वहां की कोई भी अस्थिरता न केवल क्षेत्रीय स्तर पर, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और कच्चे तेल की कीमतों को भी बुरी तरह प्रभावित कर सकती है।

अंत में, भारत ने वैश्विक मंच से यह उम्मीद जताई है कि वेनेजुएला की आम जनता के व्यापक हितों और मानवाधिकारों को ध्यान में रखते हुए वहां जल्द से जल्द शांति बहाल होगी। भारत ने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य की किसी भी कार्रवाई में अंतरराष्ट्रीय नियमों और संयुक्त राष्ट्र के चार्टर का पालन किया जाना चाहिए ताकि मामले का उचित और न्यायसंगत निपटारा सुनिश्चित हो सके।