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मानवाधिकार समूहों ने ईरान में दमन जारी होने की बात कही

विरोध प्रदर्शनों में कम से कम 16 की मौत

दुबई: ईरान इस समय एक गंभीर आंतरिक संकट से जूझ रहा है, जहाँ पिछले एक हफ्ते से बढ़ती महंगाई और आर्थिक दुर्दशा के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन जारी हैं। मानवाधिकार समूहों द्वारा रविवार को जारी रिपोर्टों के अनुसार, इन हिंसक झड़पों में कम से कम 16 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि सरकारी मीडिया और स्वतंत्र स्रोतों के आंकड़ों में भिन्नता बनी हुई है। यह पिछले तीन वर्षों में ईरान का सबसे बड़ा जन-आक्रोश है, जो देश की चरमराती अर्थव्यवस्था और बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच भड़का है।

इन प्रदर्शनों की शुरुआत तेहरान के प्रमुख बाजारों के व्यापारियों द्वारा हुई थी, जो अब छात्रों और आम जनता तक फैल चुकी है। प्रदर्शनकारी सरकार की आर्थिक नीतियों और भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। ईरान की मुद्रास्फीति दर 36 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गई है, और राष्ट्रीय मुद्रा, रियाल का मूल्य डॉलर के मुकाबले लगभग आधा रह गया है, जिससे आम लोगों का जीवन दूभर हो गया है।

सुरक्षा बलों द्वारा प्रदर्शनों को कुचलने के लिए व्यापक कार्रवाई की जा रही है। पुलिस प्रमुख अहमद-रेजा रादान ने पुष्टि की है कि सुरक्षा बल विशेष रूप से उन लोगों को निशाना बना रहे हैं जो इंटरनेट के माध्यम से विरोध प्रदर्शनों को संगठित कर रहे हैं। अब तक सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जो सरकार की दमनकारी नीति को दर्शाता है। सरकार एक ओर संवाद की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर दंगाइयों को कुचलने की सख्त चेतावनी भी जारी कर रही है।

इन आंतरिक उथल-पुथल के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों के प्रति समर्थन व्यक्त किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि ईरान सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा का सहारा लेती है, तो अमेरिका कार्रवाई करने के लिए तैयार है। यह बयान ईरान पर मौजूदा अंतर्राष्ट्रीय दबाव को और बढ़ाता है।

इसके जवाब में, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ईरान दुश्मन के सामने नहीं झुकेगा। यह बयान दर्शाता है कि ईरान की सरकार बाहरी हस्तक्षेप और दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं है, और वह अपनी संप्रभुता और आंतरिक मामलों में किसी भी बाहरी दखल का विरोध करेगी।

ईरान का परमाणु कार्यक्रम पर लगे अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों ने उसकी अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। इन प्रतिबंधों के कारण तेल निर्यात में भारी गिरावट आई है, जिससे देश को राजस्व का नुकसान हो रहा है। इसके अतिरिक्त, बिजली और पानी जैसे मूलभूत संसाधनों की कमी ने भी जनता के गुस्से को भड़काया है। इन सभी कारकों ने मिलकर एक ऐसी स्थिति पैदा कर दी है, जहाँ आम जनता का धैर्य अब जवाब दे चुका है।

यह संकट ईरान के नेतृत्व के लिए एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि उन्हें एक तरफ आर्थिक स्थिरता बहाल करनी है और दूसरी तरफ जनता के बढ़ते असंतोष और अंतर्राष्ट्रीय दबाव से निपटना है। भविष्य में यह देखना दिलचस्प होगा कि ईरान इस चुनौती का सामना कैसे करता है और क्या यह अशांति देश की राजनीतिक दिशा में कोई बड़ा बदलाव लाएगी।