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वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई को उत्तर कोरिया ने गलत कहा

यह संप्रभुता के गंभीर अतिक्रमण का मामला

प्योंगयांग: वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की नाटकीय गिरफ्तारी ने न केवल लैटिन अमेरिका, बल्कि सुदूर पूर्व में भी भू-राजनीतिक हड़कंप मचा दिया है। उत्तर कोरिया ने रविवार को इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे किसी देश की संप्रभुता पर गंभीर अतिक्रमण करार दिया है। प्योंगयांग के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक समाचार एजेंसी केसीएनए के माध्यम से जारी एक बयान में अमेरिका को दुनिया का सबसे बड़ा उपद्रवी और क्रूर राष्ट्र बताया है।

घटनाक्रम के अनुसार, शनिवार तड़के अमेरिकी विशेष बलों ने वेनेजुएला की राजधानी काराकस में एक अत्यंत साहसी और गुप्त अभियान चलाया। इस ऑपरेशन के दौरान न केवल मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लिया गया, बल्कि अमेरिकी वायुसेना ने रणनीतिक ठिकानों पर हवाई हमले भी किए। फिलहाल मादुरो न्यूयॉर्क में अमेरिकी हिरासत में हैं, जहाँ उन पर नार्को-टेररिज्म (मादक पदार्थों की तस्करी) और अवैध हथियारों के उपयोग जैसे गंभीर अंतरराष्ट्रीय आरोप लगाए गए हैं।

उत्तर कोरिया के लिए यह छापेमारी केवल एक कूटनीतिक घटना नहीं, बल्कि एक डरावना पूर्वाभ्यास है। किम जोंग उन का नेतृत्व लंबे समय से वाशिंगटन पर शासन परिवर्तन की साजिश रचने का आरोप लगाता रहा है। प्योंगयांग दशकों से तर्क देता आया है कि सद्दाम हुसैन और मुअम्मर गद्दाफी जैसे नेताओं का हश्र इसलिए हुआ क्योंकि उनके पास परमाणु हथियार नहीं थे।

मादुरो की गिरफ्तारी प्योंगयांग के इस विश्वास को और पुख्ता करती है कि केवल परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम ही अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के खिलाफ एकमात्र सुरक्षा कवच हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना के बाद उत्तर कोरिया अपनी सैन्य तैयारियों और मिसाइल परीक्षणों में और तेजी ला सकता है ताकि वह भविष्य में किसी भी वेनेजुएला जैसे परिदृश्य को टाल सके।

उत्तर कोरिया ने इस कार्रवाई को संयुक्त राष्ट्र चार्टर का सीधा उल्लंघन बताया है। प्योंगयांग ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे अमेरिका की इस आधिपत्य जमाने की मानसिकता के खिलाफ एकजुट हों। उनके अनुसार, यदि आज वेनेजुएला के साथ ऐसा हुआ है, तो कल किसी भी अन्य संप्रभु राष्ट्र को इसी तरह निशाना बनाया जा सकता है।

मादुरो की गिरफ्तारी ने शीत युद्ध जैसी ध्रुवीकरण की स्थिति पैदा कर दी है। एक तरफ अमेरिका इसे न्याय की जीत बता रहा है, तो दूसरी तरफ उत्तर कोरिया जैसे देश इसे वैश्विक शांति के लिए खतरा मान रहे हैं। यह घटना निश्चित रूप से आने वाले समय में प्योंगयांग और वाशिंगटन के बीच तनाव को एक नए स्तर पर ले जाएगी।