Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Kerala Politics: मुख्यमंत्री सतीशन और पीएम मोदी की बैठक; राज्य की प्राथमिकताओं और केंद्र से मदद पर र... Supreme Court Update: कानून के छात्रों की उपस्थिति पर SC का बड़ा फैसला; हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक Gurmeet Ram Rahim Parole: 16वीं बार जेल से बाहर आए गुरमीत राम रहीम; 30 दिन की पैरोल पर मचा सियासी बव... Amit Shah in Rajasthan: सीमा सुरक्षा हमारी प्राथमिकता; BSF जवानों के साहस और बलिदान को गृह मंत्री ने... Akhilesh Yadav Press Conference: यूपी में 'फर्जी एनकाउंटर' को लेकर अखिलेश यादव का बीजेपी पर बड़ा हमला Khagaria Encounter: बिहार एसटीएफ की बड़ी कार्रवाई; 50 हजार का इनामी कुख्यात अपराधी मोहम्मद बुद्दिन ढे... Bulandshahr Double Murder: ससुर-बहू के अवैध संबंधों ने बिगाड़ा परिवार; बेटे ने पिता और पत्नी को उतार... Gurugram Crime News: लिव-इन पार्टनर के साथ मिलकर पति ने की पत्नी की हत्या; शव बाथरूम में मिला, आरोपी... Rajasthan Heatwave Alert: गर्मी के चलते राजस्थान सरकार का बड़ा फरमान; दोपहर में जानवरों से काम लेने प... Ramgarh Crime News: राहुल दुबे गैंग का बड़ा खुलासा; पतरातू में बड़ी वारदात की योजना बनाते 6 अपराधी गिर...

केंद्र के जी राम जी कानून के खिलाफ बड़ा आंदोलन

एसकेएम का 16 जनवरी को देशव्यापी प्रदर्शन

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः संयुक्त किसान मोर्चा ने केंद्र सरकार के खिलाफ अपने संघर्ष को और तेज करने का निर्णय लिया है। हाल ही में पारित किए गए कानूनों के समूह, विशेष रूप से मनरेगा के स्थान पर लाए गए नए कानून जी राम जी के विरोध में मोर्चा ने 16 जनवरी 2026 को ‘अखिल भारतीय प्रतिरोध दिवस’ मनाने की घोषणा की है।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए एसकेएम के नेताओं ने जी राम जी को तत्काल निरस्त करने की मांग की। किसान नेताओं का तर्क है कि यह नया कानून काम के उस कानूनी अधिकार को खत्म कर देता है जो पिछले दो दशकों से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी ढांचे (मनरेगा) की आत्मा रहा है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि इस कानून को बिना किसी पर्याप्त बहस के और विपक्ष की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए संसद में जल्दबाजी में पारित किया गया।

किसान मंच ने एनडीए सरकार द्वारा पारित या प्रस्तावित अन्य विधेयकों को वापस लेने की मांग भी दोहराई है। इनमें नए श्रम कोड, बीज विधेयक 2025 और बिजली विधेयक 2025 शामिल हैं। एसकेएम ने अपनी पुरानी मांग को फिर से सामने रखा कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की वैधानिक गारंटी दी जाए।

नेताओं ने सरकार को तानाशाह और जनविरोधी बताते हुए कहा कि इस कानून को मनरेगा की जगह लेने के लिए संसद में बुलडोज किया गया है। उन्होंने याद दिलाया कि मनरेगा ने कृषि संकट, आर्थिक मंदी और महामारी के वर्षों के दौरान ग्रामीण परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण जीवन रेखा के रूप में काम किया था।

किसान संगठन ने बीमा विधेयक 2025 और शांति विधेयक 2025 की भी आलोचना की, जिसमें क्रमश: 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी भागीदारी की अनुमति दी गई है। एसकेएम का दावा है कि ये कदम श्रमिकों या किसानों के बजाय बड़े कॉर्पोरेट और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हितों को साधने के लिए उठाए गए हैं।

एसकेएम ने ग्रामीण कार्यकर्ताओं और किसानों से अपील की है कि वे गांव स्तर पर महापंचायतें आयोजित करें और नए साल में इन कानूनों के खिलाफ संघर्ष का संकल्प लें। मोर्चा ने किसान आत्महत्याओं और पलायन को रोकने के लिए व्यापक कर्ज माफी की मांग भी दोहराई। आंदोलन के अगले चरण की रणनीति तय करने के लिए 11 जनवरी को दिल्ली में राष्ट्रीय परिषद की बैठक होगी।