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साही जानवर की तस्करी करने वाले अरेस्ट, कोरिया के बैकुंठपुर से पकड़े गए शिकारी

एमसीबी: कोरिया के बैकुंठपुर वन मंडल से साही जानवर की तस्करी करने वाले आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. पकड़े गए लोग काफी वक्त से जंगली जानवरों का शिकार कर उनकी तस्करी कर रहे थे. दरअसल, बैकुंठपुर वन परिक्षेत्र के अधिकारियों को खबर मिली थी कि इलाके में शिकारी सक्रिय हैं. टेमरी बीट में शिकारी साही का शिकार कर उसका मांस भी पका रहे हैं. खबर मिलने के बाद वन परिक्षेत्र अधिकारी भगन राम टीम के साथ मौके पर पहुंचे.

साही के शिकारी गिरफ्तार

वन परिक्षेत्र अधिकारी भगन राम जब मौके पर पहुंचे तो देखा कि कुछ लोग साही के मांस के साथ बैठे हैं. वन विभाग की टीम ने इलाके की घेराबंदी करते हुए सभी को पकड़ लिया. पकड़े गए लोगों के पास से शिकार का सामान और साही जानवर का मांस बरामद हुआ. गिरफ्तारी के बाद तीनों आरोपियों को बैकुंठपुर न्यायालय में पेश किया गया. मामले की गंभीरता देखते हुए अदालत ने सभी को जेल भेजने का आदेश दिया.

वन विभाग की चेतावनी

वन विभाग ने स्पष्ट किया कि जंगलों में अवैध शिकार या वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने के किसी भी प्रयास को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. विभाग ने कहा कि ऐसे मामलों में आगे भी इसी तरह की सख्ती बरती जाएगी, ताकि वन्यजीवों का संरक्षण सुनिश्चित रहे और कोई वन्य जीवों को नुकसान पहुंचाने की हिमाकत न कर सके.

जानिए क्या होता है साही

साही एक कांटेदार जीव होता है जिसे अंग्रेजी में Porcupine कहते हैं. यह जीव एक भारी-भरकम और गोलाकार होता है. इस जीव को जैसे ही खतरा महसूस होता है ये अपने शरीर पर लगे कांटे फैला लेता है. साही जीव शाकाहारी होता है. इसके शरीर पर लगे कांटे काफी नुकीले और घातक होते हैं. खतरनाक से खरनाक जानवरी भी साही से बचता है. ये जानवर अपने भोजन पेड़ पौधों पर निर्भर रहते हैं. इनके भोजन ज़मीन पर उगने वाले पौधे, पेड़ों की छाल, गिरे हुए फल, पत्तियाँ, घास होते हैं. शिकार की वजह से इनकी संख्या में तेजी से कमी आई है. वन विभाग लगातार लोगों को समय समय पर जागरुकता अभियान के जरिए जंगली जानवरों के संरक्षण की बात बताता रहता है. बावजूद इसके शिकारी अपनी हरकतों से बाज नहीं आते.

जानिए क्या है वन्य प्राणी अधिनियम 1972

वन्य प्राणी अधिनियम, जिसे वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 भी कहते हैं, भारत में वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए बनाया गया एक कानूनी ढाँचा है. यह अधिनियम वन्यजीवों के शिकार, उनके व्यापार और उनके आवासों के संरक्षण को नियंत्रित करता है, साथ ही विभिन्न वन्यजीवों के लिए अनुसूचियां भी निर्धारित करता है. इसका उद्देश्य संकटग्रस्त प्रजातियों की रक्षा करना, पर्यावरण संतुलन बनाए रखना और वन्यजीवों से संबंधित गतिविधियों को विनियमित करना है.