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“उपजाऊ जमीन पर चूना पत्थर खदान लगेगा तो हम क्या करेंगे”, छुईखदान के किसानों का दुर्ग में जोरदार प्रदर्शन

दुर्ग: खैरागढ़ छुईखदान गंडई जिले में प्रस्तावित चूना पत्थर खदान और भूमि अधिग्रहण के विरोध में शुक्रवार को सैकड़ों किसान दुर्ग स्थित पर्यावरण संरक्षण कार्यालय पहुंच गए. किसानों ने कार्यालय का घेराव कर प्रशासन और सीमेंट कंपनी के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की. ग्रामीणों का आरोप है कि बिना ग्रामसभा की सहमति के खदान की अनुमति दी जा रही है, जिससे उनके जीवनयापन पर सीधा खतरा है.

11 दिसंबर को जनसुनवाई का विरोध

खैरागढ़ जिले के संडी, पंडरिया, बुंदेली, ओटेबन्द, बिचारपुर और भरदा गांवों में चूना पत्थर निकालने के लिए प्रशासन ने अनुमति प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है. इसी के तहत सीमेंट कंपनी के लिए 65 एकड़ जमीन पहले ही अधिग्रहित की गई है. अब पर्यावरण विभाग 11 दिसंबर को जनसुनवाई आयोजित कर रहा है, जिसमें कंपनी को लगभग हजारों एकड़ अतिरिक्त भूमि हस्तांतरित किए जाने का प्रस्ताव है.

चूना पत्थर खदान का विरोध, ग्रामीणों का प्रदर्शन

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि वे कृषि पर आधारित हैं और जमीन ही उनकी आजीविका का आधार है. खदान शुरू होने से खेती किसानी, जलस्तर और पर्यावरण को भारी नुकसान होगा. ग्रामीण स्पष्ट तौर पर अपनी जमीन किसी भी कीमत पर कंपनी को नहीं देने की बात कह रहे हैं. उन्होंने यह भी बताया कि ग्रामसभा ने प्रस्ताव का विरोध किया है और एनओसी जारी नहीं की गई है, इसके बावजूद प्रशासन आगे बढ़ रहा है.

चूना पत्थर खदान से 20 से 22 गांव प्रभावित हो रहे हैं. समूचा क्षेत्र उजड़ने की कगार पर है – मोतीलाल जंघेल, किसान

कृषि क्षेत्र होने के कारण सघन आबादी है. वहां की जमीन बहुत उपजाऊ है इसलिए किसान साल में तीन फसल लेते हैं. सीमेंट खदान लगने से वहां के किसान बर्बाद हो जाएंगे -जीवन जंघेल, पूर्व विधायक

ग्राम सभा की अनुमति के बिना सरकार ने खदान की नीलामी कर दी. 11 दिसंबर को जनसुनवाई की जा रही है. 1000 एकड़ जमीन ली जा रही है जिससे 1 लाख लोग प्रभावित हो रहे हैं -सुधीर गोलछा, सभापति, जनपद पंचायत छुईखदान

ग्रामीणों ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी

खैरागढ़ से बड़ी संख्या में दुर्ग पहुंचे पुरुषों, महिलाओं और बुजुर्गों ने चेतावनी दी है कि यदि जनसुनवाई रद्द नहीं की जाती और चूना खदान का परमिशन वापस नहीं लिया जाता है तो आने वाले समय में उग्र आंदोलन किया जाएगा. किसानों ने कहा कि वे अपनी जमीन और पर्यावरण बचाने के लिए हर स्तर पर लड़ाई जारी रखेंगे.