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दोहा में विश्व पंचायत में गंभीर चर्चा

सामाजिक अनुबंधों में नई जान फूंकने का प्रयास

दोहाः सामाजिक विकास के लिए दूसरे विश्व शिखर सम्मेलन का आयोजन हाल ही में कतर की राजधानी दोहा में किया गया, जिसे संयुक्त राष्ट्र ने विश्व पंचायत का नाम दिया है। इस महत्वपूर्ण वैश्विक आयोजन का उद्देश्य वैश्विक समुदाय के बीच सामाजिक अनुबन्ध में नई जान फूँकना है, जो बढ़ती असमानताओं, घटते विश्वास और जलवायु परिवर्तन जैसी बहुआयामी चुनौतियों के कारण कमजोर हो रहा है।

संयुक्त राष्ट्र के उप-महासचिव ली जुनहुआ ने शिखर सम्मेलन के उद्घाटन के दौरान कहा कि यह बैठक एक महत्वपूर्ण मोड़ पर हो रही है, जब दुनिया भर में असमानताएँ बढ़ रही हैं और समुदाय युद्ध, टकराव और त्वरित तकनीकी बदलावों से जूझ रहे हैं। दोहा में दुनिया भर के नेताओं, नीति निर्माताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवाओं ने एक साथ आकर एक अधिक न्यायपूर्ण और समावेशी विश्व के निर्माण के लिए नए विचारों पर मंथन किया।

सम्मेलन का मुख्य फोकस निर्धनता उन्मूलन, समावेशी विकास और सभी के लिए सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने पर था। चर्चाएँ इस बात पर केंद्रित रहीं कि 1995 में कोपेनहेगन में हुए पहले इस संगठन की भावना को कैसे पुनर्जीवित किया जाए। प्रतिभागी इस बात पर सहमत हुए कि केवल आर्थिक विकास ही पर्याप्त नहीं है; एक मजबूत सामाजिक ताना-बाना और सभी नागरिकों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।

विशेष रूप से, जन-केन्द्रित स्मार्ट शहरों के विकास, डेटा-आधारित नीति-निर्माण और नई तकनीकियों का उपयोग मानव कल्याण के लिए करने पर जोर दिया गया। दोहा घोषणापत्र में सभी देशों से आग्रह किया गया है कि वे सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को अपनी राष्ट्रीय नीतियों में प्राथमिकता दें और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने के लिए एकजुट होकर काम करें। यह शिखर सम्मेलन बहुपक्षवाद और वैश्विक सहयोग की आवश्यकता को रेखांकित करता है।