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भारत-अमेरिका ने किया 10 साल का बड़ा रक्षा करार

काफी दिनों में कूटनीतिक रिश्ते सुधरने की दिशा में

वाशिंगटनः भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका ने अगले दस वर्षों के लिए एक महत्वपूर्ण रक्षा और प्रौद्योगिकी सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता दोनों देशों के बीच सामरिक साझेदारी को और मजबूत करने तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और शांति बनाए रखने के साझा दृष्टिकोण को दर्शाता है। यह करार ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहे हैं, खासकर चीन की बढ़ती मुखरता के मद्देनजर।

इस समझौते के तहत, दोनों देश उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों के संयुक्त विकास और उत्पादन, खुफिया जानकारी साझा करने, और सैन्य प्रशिक्षण अभ्यास के विस्तार पर ध्यान केंद्रित करेंगे। प्रमुख क्षेत्रों में मानव रहित हवाई वाहन (ड्रोन), जेट इंजन प्रौद्योगिकी, और साइबर सुरक्षा शामिल हैं। यह करार भारत की मेक इन इंडिया पहल को भी बढ़ावा देगा, जिससे भारतीय रक्षा विनिर्माण क्षमताओं में सुधार होगा और आयात पर निर्भरता कम होगी। समझौते का एक प्रमुख पहलू यह है कि यह भारत को अमेरिकी रक्षा आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बनने की अनुमति देता है, जिससे दोनों देशों की सेनाओं के बीच अंतर्संचालनीयता बढ़ेगी।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता केवल हथियारों की खरीद-फरोख्त तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक गहरी रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक है। यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक स्वतंत्र और खुले माहौल को सुनिश्चित करने के लिए भारत और अमेरिका के साझा संकल्प को मजबूत करता है। यह करार अमेरिकी विदेश नीति के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भारत को क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रदाता के रूप में देखता है। हाल ही में, दोनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्रियों के बीच हुई वार्ता में भी इस समझौते को अंतिम रूप दिया गया। यह समझौता दोनों देशों के लिए रक्षा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग के नए द्वार खोलेगा।