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एक सौ नये फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाये जाएंगे, 1172 की संपत्ति होगी जब्त

बिहार पुलिस की अपराधियों पर बड़ी चोट

  • डीजीपी विनय कुमार की नई कार्यशैली

  • बीएनएसएस कानून बना नया हथियार

  • भ्रष्ट पुलिसवालों पर भी पूरी सख्ती

दीपक नौरंगी

पटनाः बिहार पुलिस अब संगठित अपराधों पर लगाम कसने और पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने के लिए कमर कस चुकी है। राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनय कुमार ने पुलिस मुख्यालय में एक प्रेस वार्ता के दौरान कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं, जिनसे राज्य में कानून व्यवस्था में सुधार की उम्मीद है। डीजीपी विनय कुमार की कार्यशैली से आम जनता भी प्रभावित दिख रही है।

बीएनएसएस कानून बना अपराधियों के खिलाफ हथियार

बिहार पुलिस ने नए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) कानून को अपराधियों के खिलाफ एक शक्तिशाली हथियार बनाने का फैसला किया है। डीजीपी ने बताया कि इस कानून की धारा-107 के तहत अपराधियों की अवैध संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। अब डीएसपी स्तर के अधिकारी भी संपत्ति जब्ती का प्रस्ताव सीधे न्यायालय को भेज सकेंगे, जिससे प्रक्रिया पहले से अधिक सुगम और तेज हो जाएगी। पहले यह कार्य प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सहयोग से होता था, जिसमें काफी समय और जटिलता लगती थी।

राज्य में कुल 1172 अपराधियों की संपत्ति जब्त करने की तैयारी है। इसके लिए 1249 थानों में से 1172 चिन्हित अपराधियों की सूची बनाई गई है। इनमें से 239 मामलों में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारियों को प्रस्ताव मिल चुके हैं, जबकि 188 मामलों में न्यायालय में जब्ती के प्रस्ताव दाखिल भी हो चुके हैं।

100 फास्ट ट्रैक कोर्ट से मिलेगा त्वरित न्याय

डीजीपी विनय कुमार ने बताया कि बिहार सरकार को 100 नए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है, जिनका गठन राज्य के सभी जिलों में किया जाएगा। इन अदालतों का मुख्य उद्देश्य हत्या, लूट और डकैती जैसे गंभीर आपराधिक मामलों में प्राथमिकता के आधार पर त्वरित ट्रायल सुनिश्चित करना है। इससे न केवल अपराधियों को जल्द सजा मिलेगी, बल्कि निर्दोषों को राहत और पीड़ितों को भी समय पर न्याय मिल पाएगा।

पीड़ितों को मिलेगा मुआवजा, भ्रष्ट पुलिसकर्मियों पर भी सख्ती

यह एक महत्वपूर्ण बदलाव है कि नए कानून के तहत जब्त की गई अवैध कमाई का एक हिस्सा पीड़ित परिवारों की मदद में खर्च किया जाएगा। यह कदम न्याय को जनहित से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।

डीजीपी विनय कुमार ने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने आम जनता से अपील की कि यदि कोई पुलिस अधिकारी या कर्मी रिश्वत मांगता है, तो वे सीधे निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, विशेष निगरानी इकाई, आर्थिक अपराध इकाई या पुलिस मुख्यालय से शिकायत कर सकते हैं।

डीजीपी ने आंकड़े जारी करते हुए बताया कि जनवरी से 12 जून 2025 तक 12 पुलिस पदाधिकारियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया है। इस अवधि में 22 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई, जिनमें से 15 को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया। इसके अतिरिक्त, 66 पुलिसकर्मियों को निलंबित भी किया गया है। इन कदमों से बिहार में अपराध पर लगाम लगने और आम जनता को न्याय मिलने की उम्मीद है।