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साइबर अपराध और नशा तस्करी पर लगेगी लगाम!

बिहार पुलिस को मिली नई ताकत

  • दो नई विशिष्ट इकाइयों का गठन

  • आईजी/एडीजी स्तर के अधिकारी करेंगे कमान

  • डीजीपी ने किया नए पुलिस पिकेट का उद्घाटन

दीपक नौरंगी

पटनाः बिहार पुलिस राज्य में साइबर अपराधों और मादक पदार्थों की तस्करी से निपटने के लिए अब पूरी तरह तैयार है। पुलिस मुख्यालय के प्रस्ताव पर सरकार ने दो नई विशिष्ट इकाइयों के गठन को मंजूरी दे दी है। इन इकाइयों पर जल्द ही कैबिनेट की अंतिम मुहर लगेगी, जिसके बाद ये पूरी तरह से काम करना शुरू कर देंगी। इन महत्वपूर्ण इकाइयों की कमान आईजी या एडीजी रैंक के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को सौंपी जाएगी, जो इन गंभीर चुनौतियों से निपटने के लिए विशेष रूप से केंद्रित दृष्टिकोण सुनिश्चित करेंगे।

पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनय कुमार ने अपनी सक्रियता दिखाते हुए लखीसराय जिले के हलसी थानांतर्गत तरहारी पुलिस पिकेट का उद्घाटन किया। उनके साथ माननीय न्यायमूर्ति राजीव रंजन, पुलिस उप महानिरीक्षक, मुंगेर क्षेत्र, जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और अन्य वरीय पदाधिकारीगण भी मौजूद थे। डीजीपी विनय कुमार ने पदभार संभालने के बाद से ही नशा कारोबारियों के खिलाफ सख्त अभियान चला रखा है, जिसका परिणाम अब इन नई इकाइयों के गठन के रूप में सामने आया है।

बिहार पुलिस में गठित की जा रही ये दो नई इकाइयां हैं: साइबर क्राइम सह साइबर सुरक्षा इकाई और स्टेट एंटी नारकोटिक सह मद्य निषेध इकाई। एडीजी (मुख्यालय) कुंदन कृष्णन ने एक प्रेस वार्ता में बताया कि इन इकाइयों का मुख्य उद्देश्य मादक पदार्थों और अवैध हथियारों की तस्करी के जरिए अवैध कमाई करने वाले अपराधियों की पहचान करना और उनकी संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया को तेज करना है। उन्होंने बताया कि अब तक ऐसे 6-7 अपराधियों की पहचान की जा चुकी है और उनकी संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी।

एडीजी कुंदन कृष्णन ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि बिहार में रासायनिक या अफीम से बनने वाले मादक पदार्थों का उपयोग सबसे ज्यादा होता है। उन्होंने बताया कि कुछ रासायनिक पदार्थ या दवाएं, जैसे कफ सिरप और चुनिंदा सुइयां, नशीले पदार्थ के रूप में उपयोग की जा रही हैं और बिना किसी डॉक्टरी पर्चे के बेची जा रही हैं। एडीजी ने यह भी कहा कि छोटे स्थानों जैसे झोपड़ियों और गुमटियों से मादक पदार्थ बेचने वालों पर भी कड़ी कार्रवाई होगी।

साइबर अपराध इकाई को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के तौर पर विकसित किया जाएगा। यह इकाई साइबर अपराधियों को पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाएगी और इसमें एक अत्याधुनिक साइबर लैब भी तैयार किया जाएगा। इस लैब में मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामानों का विश्लेषण किया जाएगा। इसके लिए कुछ खास पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, ताकि वे आधुनिक साइबर अपराधों से प्रभावी ढंग से निपट सकें।