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India-Pakistan Relations: पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे ने किया RSS नेता होसबोले का समर्थन, ‘बातचीत जरूरी’

सेना के पूर्व प्रमुख जनरल मनोज नरवणे ने बुधवार को RSS नेता दत्तात्रेय होसबोले के इस रुख का समर्थन किया कि पाकिस्तान के साथ बातचीत करने की इच्छा रखना जरूरी है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के लोगों के बीच दोस्ती से आपसी रिश्ते बेहतर हो सकते हैं. नरवणे ने एक कार्यक्रम में कहा कि सीमा के दोनों ओर आम लोग रहते हैं, जिनकी आम समस्याएं ‘रोटी, कपड़ा और मकान’ से जुड़ी हैं. आम आदमी का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं होता. जब दोनों देशों के लोगों के बीच दोस्ती होगी, तो दोनों देशों के बीच भी दोस्ती होगी.

🔓 बातचीत के दरवाजे बंद न करें: RSS नेता होसबोले की बड़ी अपील

पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि ये सही कदम है और लोगों के बीच आपसी संपर्क जरूरी है. नरवणे की यह टिप्पणी RSS के दूसरे सबसे बड़े नेता दत्तात्रेय होसबोले के बयान के एक दिन बाद आई है. होसबोले ने कहा था कि भारत को पाकिस्तान के साथ बातचीत के रास्ते खुले रखने चाहिए. उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि पुलवामा जैसी घटनाएं होती हैं, तो उचित जवाब देना होगा, लेकिन बातचीत के दरवाजे हमेशा खुले रहने चाहिए.

🌍 सिविल सोसाइटी का महत्व: तनाव कम करने में मददगार होंगे आपसी संबंध

जनरल नरवणे ने कहा कि लोगों के बीच आपसी संबंध भारत-पाकिस्तान के तनाव को कम कर सकते हैं, क्योंकि हमारे सांस्कृतिक जुड़ाव हैं और हम कभी एक ही देश थे. उनका पक्का मानना है कि सिविल सोसाइटी के आपसी संपर्क आखिरकार पाकिस्तान के साथ संबंधों को सामान्य बनाने में मदद करेंगे. अब इस दिशा में और ज्यादा कोशिशें की जानी चाहिए. होसबोले ने भी पाकिस्तानी खिलाड़ियों, वैज्ञानिकों और सिविल सोसाइटी के सदस्यों से शांति के लिए ‘आगे आने’ की अपील की है.

🪖 सेना प्रमुख के रूप में अनुभव: जनरल नरवणे का कार्यकाल और सुरक्षा चुनौतियां

नरवणे ने दिसंबर 2019 से अप्रैल 2022 तक भारतीय सेना प्रमुख के तौर पर अपनी सेवाएं दीं. वह फरवरी में तब सुर्खियों में आए थे, जब उनकी अप्रकाशित आत्मकथा के कुछ अंशों का हवाला देते हुए विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भारत-चीन लद्दाख संकट के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा था. हालांकि, पाकिस्तान के संदर्भ में उनका वर्तमान बयान कूटनीतिक और मानवीय दृष्टिकोण पर आधारित है.

🛡️ पड़ोसी देश की सेना पर भरोसा नहीं: शांति के लिए वैकल्पिक मार्ग की तलाश

RSS नेता होसबोले ने अपने बयान में एक महत्वपूर्ण बात कही कि पड़ोसी देश की सेना पर भरोसा नहीं किया जा सकता, इसलिए नागरिक स्तर पर संवाद की आवश्यकता है. RSS, जो सत्ताधारी बीजेपी का वैचारिक मार्गदर्शक है, की ओर से आया यह बयान भारत की भविष्य की विदेश नीति और पड़ोसी देशों के साथ संबंधों की दिशा में एक नया संकेत माना जा रहा है. फिलहाल, सुरक्षा और संवाद के बीच संतुलन बनाने की कोशिश जारी है.