ईरान के ठिकानों पर हमले के लिए पूरी तरह तैयार
एजेंसियां
वाशिंगटन से प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने गुरुवार को एक कड़ा बयान जारी करते हुए कहा है कि अमेरिकी सेना ईरान के बिजली संयंत्रों और ऊर्जा उद्योग पर हमला करने के लिए पूरी तरह तैयार है। हेगसेथ ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में जारी समुद्री नाकेबंदी केवल युद्धविराम के दौरान एक शिष्ट व्यवहार का उदाहरण है, और यदि आदेश मिला, तो अमेरिकी सेना विनाशकारी प्रहार करने से पीछे नहीं हटेगी।
सैन्य तैयारी और नाकेबंदी का विस्तार पेंटागन की ब्रीफिंग में हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका पहले से कहीं अधिक शक्ति और बेहतर खुफिया जानकारी के साथ खुद को रीलोड कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और बिजली उत्पादन केंद्रों को लक्ष्य बनाया जा चुका है। गौरतलब है कि सोमवार से प्रभावी हुई अमेरिकी नाकेबंदी के तहत अब तक 14 जहाजों को वापस लौटने पर मजबूर किया गया है। इस अभियान में लगभग 10,000 सैन्य कर्मी और दर्जनों युद्धपोत व विमान शामिल हैं।
अमेरिका और इज़राइल द्वारा 28 फरवरी को शुरू किए गए इस युद्ध ने वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति में अब तक का सबसे बड़ा व्यवधान पैदा किया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का प्रशासन इस सैन्य दबाव के जरिए ईरान को अपनी शर्तों पर समझौता करने के लिए मजबूर करना चाहता है। इन शर्तों में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलना शामिल है, जहाँ से दुनिया के कुल तेल और गैस निर्यात का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। अगले सप्ताह समाप्त होने वाले युद्धविराम के बीच, ट्रम्प प्रशासन ईरान पर आर्थिक दबाव और अधिक बढ़ाने की तैयारी में है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर और जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने पुष्टि की है कि अमेरिकी सेना किसी भी क्षण बड़े पैमाने पर युद्धक अभियान शुरू करने के लिए तैयार है। जनरल केन ने चेतावनी दी कि ईरान की ओर जाने वाले या उसे सहायता पहुंचाने वाले किसी भी जहाज को न केवल क्षेत्रीय जल क्षेत्र में, बल्कि भारत-प्रशांत क्षेत्र में भी रोका जाएगा।
अमेरिकी नौसेना ने अपनी नई एडवाइजरी में हथियारों, गोला-बारूद, परमाणु सामग्री के साथ-साथ कच्चे तेल, रिफाइंड तेल उत्पादों, लोहे और स्टील को प्रतिबंधित सामग्री की सूची में डाल दिया है। इन सामग्रियों को ले जाने वाले जहाजों की तलाशी लेने और उन्हें जब्त करने का अधिकार अमेरिकी सेना के पास होगा। विश्लेषकों का मानना है कि ईरान तेल निर्यात पूरी तरह बंद होने की स्थिति में अधिकतम दो महीने तक ही टिक सकता है।